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सैलूनों का दुरुपयोग करने से बाज नहीं आते आला अधिकारी, जांच से कतराता है रेलवे प्रशासन

Wed, 09 Oct 2019 02:49 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pti
केस-1
ठंडे बस्ते में चली गई जांच

पूर्वोत्तर रेलवे के एक मुख्यालय स्तर के अधिकारी ने सैलून से 27 बार मऊ स्टेशन का निरीक्षण किया। आरटीआई लगाई गई तो सामने आया कि जांच की आड़ में सैलून का दुरुपयोग हो रहा था। लिहाज जांच शुरू हुई, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि जिन्हें जांच सौंपी गई, उनके आला अधिकारी वह खुद थे। लिहाजा जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
केस-2
जांच हुई तो छिपा ली जानकारी

सैलून का दुरुपयोग कर गोरखपुर से लखनऊ आने वाले एक आला रेलवे अधिकारी को बीच रास्ते में उतार दिया गया। खबरें छपी तो जांच शुरू हुई। लेकिन जांच करने वालों ने आला अधिकारी से जब जानकारी जुटाने की कोशिश की तो अधिकारी ने उन्हें अर्दब में ले लिया और जांच वहीं की वहीं दब गई।
केस-3
आरटीआई में खुली पोल, रिजल्ट शून्य

सेंट्रल रेलवे में सैलून के दुरुपयोग को लेकर आरटीआई लगी। जिसमें एडीआरएम ने 48 बार, सीनियर डीओएम ने 43 सहित अन्य अधिकारियों को मिलाकर कुल 132 बार सैलून इस्तेमाल किया गया। यहां भी जांच शुरू हुई, लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात ही रहा।

रेलवे में सैलूनों के दुरुपयोग के बाद जांच में घालमेल के ये तीन उदाहरण महज बानगी मात्र हैं। ऐसे कई मामले सामने आते रहते हैं। इसके बावजूद सैलूनों का दुरुपयोग रोकने की कोई कारगर व्यवस्था नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
 यदि अधिकारी सैलूनों का मिसयूज करते पाए जाते हैं तो जांच तक पूरी नहीं होने देते और मामले फंसे रहते हैं। इससे दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। रेलवे में सैलूनों का इस्तेमाल निरीक्षण के लिए किया जाता है। लेकिन आला अधिकारी अपने निजी कामों को निपटाने के लिए भी सैलूनों का इस्तेमाल करने से बाज नहीं आते हैं। लखनऊ कानपुर दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि एक ओर जहां जनरल, स्लीपर और यहां तक कि एसी व चेयरकार में आम यात्रियों का सफर मुहाल हो रहा है।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वहीं दूसरी ओर रेलवे अधिकारी अपने निजी कामों में भी सैलून का इस्तेमाल कर लाखों रुपये की बर्बादी कर रहे हैं। इन पर अंकुश लगाना तो दूर कोई जांच तक नहीं होती। रेलवे बोर्ड को सख्त नियम-कानून बनाने होंगे कि सैलून का मिसयूज करने पर कठोर कार्रवाई हो सके।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
सहालग के साथ शुरू हो जाते हैं निरीक्षण
डीआरयूसीसी सदस्य संजीव कपूर ने बताया कि सैलूनों के दुरुपयोग की स्थिति यह है कि सहालग शुरू होते ही अधिकारी निरीक्षण शुरू कर देते हैं। दिल्ली से लखनऊ, लखनऊ से मुम्बई अधिकारी शादियां अटेंड करने जाते हैं और स्टेशन का निरीक्षण दिखा देते हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि इतने इंस्पेक्शन के बावजूद व्यवस्थाएं दुरुस्त क्यों नहीं होतीं।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
स्टेशन पर पिट जाती हैं ट्रेनें
स्टेशनों पर जब ट्रेनों में सैलून लगाए जाते हैं तो दूसरी ट्रेनें पिट जाती हैं। यानी उनकी पंक्चुअलिटी गड़बड़ा जाती है। चारबाग स्टेशन पर शाम को सैलूनों की वजह से ट्रेनें पिटती हैं। हाल ही में रेलवे बोर्ड के एक सदस्य लखनऊ आए तो वापसी में उनका सैलून दिल्ली जाने वाली ट्रेन में फिट नहीं हो सका। इससे पावर कार हटाई गई और उसकी जगह दूसरी पावर कार लगी। इस दौरान कई ट्रेनों का संचालन बाधित हुआ।
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