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'असली अयोध्या' के बयान पर संतों में उबाल, इतिहासकार बोले- अंग्रेजों ने दिया, वरना भारत का था जनकपुर

Wed, 15 Jul 2020 02:25 PM IST
ishwar ashish धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
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रामनगरी का विहंगम दृश्य - फोटो : अमर उजाला
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के कहा था कि भगवान राम नेपाली हैं न कि भारतीय। असली अयोध्या नेपाल में है, भारत में नहीं। भारत ने सांस्कृतिक अतिक्रमण के लिए नकली अयोध्या का निर्माण किया। तथ्यों को तोड़ मरोड़कर नेपाल पर सांस्कृतिक रूप से अत्याचार किया गया है। इस पर अयोध्या के संतो में भारी आक्रोश है।

उनका कहना है कि ओली चीन के प्रभाव में आकर ऐसा कह रहे हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी अथर्ववेद के ‘अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या’ श्लोक का जिक्र किया गया है। यह बताने की जरूरत नहीं कि रामजन्म स्थान कहां है, इसकी एक-एक इंच माप धर्म ग्रंथों में दी गई है। वहीं, इतिहासविद् का कहना है कि वर्ष 1816 की संधि में राजा जनक की नगरी व प्रभु राम की ससुराल को अंग्रेजों ने नेपाल को सौंपा दिया था, वरना जनकपुर समेत पूरा मिथिलांचल आज भी भारत में होता।
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- फोटो : अमर उजाला
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने बताया कि हमारे गुरु महाराज परमहंस रामचंद्रदास जी ने रामलला की जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए कठोर संघर्ष किया। जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट तक अकाट्य तर्क दिए। तमाम पत्रकार-लेखक उनके सामने निरुत्तर हो जाते थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में दिगंबर अखाड़ा की ओर से तमाम सुबूत व तथ्य दिए गए थे।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी ने गवाही में स्कंद पुराण के अयोध्या महात्म्य का हवाला देकर कहा था कि लोमश ऋषि का आश्रम मौजूदा राम जन्मभूमि से पूरब में है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में जगद्गुरु रामनंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने तर्कों से सिद्ध किया था कि बाबरी मस्जिद ही राम जन्मभूमि है।
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- फोटो : अमर उजाला
अयोध्या प्रवास के दौरान राम जन्मस्थान के दर्शन किए थे
प्रमुख गवाह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्कंद पुराण का हवाला देकर कहा था, अपने अयोध्या प्रवास के दौरान राम जन्मस्थान के दर्शन किए थे। वहां ब्रिटिश अफसर सर एडवर्ड की ओर से 1901-02 में लगाए गए पांच-छह पत्थर देखे थे। ये पत्थर राम जन्मभूमि से बड़ा स्थान, राम जन्मभूमि, पिंडार्क, लोमश, विघ्नेश और वशिष्ठ कुंड में लगाए गए थे।

अधिवक्ता पीएन मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट में अकाट्य तर्क, साक्ष्य व देश-विदेश के तत्कालीन लेखकों की पुस्तकों के उद्धरण के माध्यम से साबित किया कि राम जन्मभूमि के बाद बाबरी मस्जिद उसी भूमि पर बनाई गई।

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- फोटो : amar ujala
जनकपुर भारत का हिस्सा हुआ करता था
अवध विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर व इतिहास-पुरातत्व विभाग के प्रो. अजय प्रताप सिंह का कहना है कि जनकपुर भारत का हिस्सा हुआ करता था। 2 दिसंबर, 1815 को सुगौली संधि पर हस्ताक्षर के बाद 4 मार्च, 1816 को भगवान राम की ससुराल नेपाल को सौंप दी गई। लुंबिनी के साथ भी ऐसा ही किया।

भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी, भारत का हिस्सा हुआ करता था, उसे भी 1816 की सुगौली संधि में अंग्रेजों ने नेपाल को दे दिया। बड़ी बात है कि जनकपुर, हिंदुस्तान की 80 फीसदी हिंदू आबादी की आस्था का केंद्र है।
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- फोटो : अमर उजाला
चीन की शह पर काम कर रहा नेपाल
पद्मविभूषित तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने नेपाल के प्रधानमंत्री के नेपाल में राम जन्मभूमि होने और भारत की अयोध्या पर प्रश्न चिह्न खड़ा करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली को मूर्खता पूर्ण वक्तव्य नहीं देना चाहिए। चीन की शह पर नेपाल को काम नहीं करना चाहिए।
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उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य - फोटो : amar ujala
भगवान राम पर ओली का बयान उनका मानसिक दिवालियापन : मौर्य
भगवान राम को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बयान पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन पर निशाना साधा है। मौर्य ने ट्वीट किया, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली को लेकर नेपाल के कम्युनिस्ट प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का बयान उनका मानसिक दिवालियापन दिखाता है। ओली को मालूम होना चाहिए कि नेपाल भी पूर्व में आर्यावर्त (भारत) का हिस्सा रहा है।
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- फोटो : amar ujala
वर्तमान अयोध्या ही असली जिसे दुनिया है जानती : विहिप
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या वही है जिसे दुनिया जानती है। हर वर्ष श्रीराम की बरात अयोध्या से नेपाल के जनकपुरी जाती है। इसलिए अयोध्या को लेकर भ्रम फैलाना संभव नहीं है। यह बयान संभवत: किसी विदेशी ताकत के दबाव में दिया गया है। ये भारत और नेपाल के धर्मनिष्ठ हिंदू समाज के अटूट संबंधों को तोड़ने का एक असफल प्रयास भर है ।

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महंत नृत्यगोपाल दास - फोटो : अमर उजाला
भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में पूजित हैं श्रीराम : नृत्यगोपाल दास
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि ओली भारत और नेपाल के संबंधों को नष्ट कर रहे हैं। भगवान श्रीराम को भारत से अलग करने का ओली अलाप उनके कुंठित और भ्रमित मानसिकता को दर्शाता है। श्रीसीताराम जी भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में पूजित हैं।

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बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इक़बाल अंसारी - फोटो : amar ujala
हनुमान जी को गुस्सा आया तो मिट जाएगा नेपाल : इकबाल अंसारी
नेपाल के पीएम के बयान पर अयोध्या के मुस्लिम समाज ने भी नाराजगी व्यक्त की है। बाबरी मस्जिद मामले में पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने तो यहां तक कहा कि श्रीराम के सेवक हनुमान जी को गुस्सा आया तो नेपाल नक्शे से ही गायब हो जाएगा। क्योंकि अयोध्या में भगवान राम के साथ हनुमान भी विराजमान हैं।
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शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी। - फोटो : अमर उजाला
चीन के इशारे पर काम कर रहा नेपाल : रिजवी
शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास और शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भगवान राम पर दिए गए बयान की निंदा की है। मौलाना ने कहा कि चीन और पाकिस्तान कभी भी किसी के दोस्त नहीं रहे हैं। यह नेपाल को टिश्यू पेपर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

वहीं, वसीम रिजवी ने कहा कि जब भगवान राम सीता के लिए श्रीलंका पर चढ़ाई कर सकते हैं तो क्या नेपाल से सीता को विवाह करके नहीं ला सकते। नेपाल के प्रधानमंत्री के दिमाग में चीनी वायरस घुस गया है।
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