मई में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कई मंत्रियों की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की देखरेख में क्लास लगेगी। राजधानी में लगने वाली इस क्लास में मंत्रियों को कामकाज के सरोकारों के पाठ पढ़ाए जाएंगे। साथ ही उन्हें भगवा टोली की प्राथमिकताएं समझाई जाएंगी। शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी मनन-मंथन होगा।
उन उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा जिनके सहारे ज्यादा से ज्यादा छात्र-छात्राओं को संघ की विचारधारा के नजदीक लाया जा सके। पाठ्यक्रमों का ऐसा स्वरूप तय किया जा सकता है जो छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कृति और सरोकारों की घुट्टी ही न पिलाए बल्कि उन्हें इसके प्रति आग्रही भी बनाए।
विद्यार्थी परिषद की अगुवाई में लगने वाली इस क्लास में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और सुरेश सोनी सहित भगवा टोली के कई वरिष्ठ हिस्सा लेंगे। मंत्रियों की क्लास से पहले 25 से 27 मई तक यहां विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक होगी।
इसके बाद 28 मई से विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी लखनऊ में ही होनी है। इसके उद्घाटन सत्र में राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ हिस्सा लेंगे। इन बैठकों में भगवा टोली अपने एजेंडे को अंतिम रूप देगी।
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इस तरह हो रही कवायद
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- फोटो : अमर उजाला
संघ की पहल पर विद्यार्थी परिषद काफी पहले से शिक्षा के गैर भारतीयकरण की साजिश के खिलाफ आवाज उठाती रही है। पिछले दिनों उप मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा एक कार्यक्रम में कह भी चुके हैं कि योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
यही नहीं, होसबोले के साथ संघ के दूसरे सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल की इस सिलसिले में देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विचार-विमर्श भी हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, इस महीने के अंतिम सप्ताह में शिक्षा में भारतीय संस्कृति के सरोकार शामिल करने के मुद्दे पर होसबोले व डॉ. कृष्ण गोपाल की कुछ और कुलपतियों के साथ बातचीत प्रस्तावित है।
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ये मंत्री लेंगे हिस्सा
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तीन दिन की इस बैठक में योगी सरकार के उन मंत्रियों को विशेष तौर से बुलाया जाएगा जो पहले कभी विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं।
इनमें सूर्यप्रताप शाही, सत्यदेव पचौरी, आशुतोष टंडन, श्रीकांत शर्मा, स्वतंत्र देव सिंह, भूपेन्द्र चौधरी, सुरेश राणा, उपेन्द्र तिवारी, नीलकंठ तिवारी व स्वाति सिंह शामिल हैं।
बताया जाता है कि विद्यार्थी परिषद में काम कर चुके मंत्रियों को बुलाने के पीछे मंशा इनकी एजेंडे के बारे में समझ और परिषद के कार्यकर्ता के नाते कामधाम की जानकारी होना है।
इन मंत्रियों के जरिये सरकार के बाकी मंत्रियों को जानकारी दी जाएगी ताकि इस तरह के मुद्दों पर वे सवालों का ठीक से जवाब दे सकें।
उप्र में पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा मदरसों को अतिरिक्त सहायता और मुस्लिम बालिकाओं को मदद जैसे मुद्दों का विरोध विद्यार्थी परिषद के एजेंडे का हिस्सा रहा है।
समझा जाता है कि अब जब यहां भाजपा की सरकार बन चुकी है तो इस बैठक के जरिये इन विसंगतियों को दुरुस्त करने के साथ शिक्षा से जुड़े कामों पर आगे बढ़ने की योजना है।
संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि बीते दिनों शिक्षा के पाठ्यक्रमों से काफी छेड़छाड़ की गई है। भारतीय संस्कृति व इतिहास के कई महत्वपूर्ण तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पाठयक्रम में शामिल कर दिया गया है।
इससे नई पीढ़ी अतीत की समृद्धिशाली परंपराओं से दूर होती जा रही है। इसे ठीक करना सबसे बड़ी चुनौती है। लखनऊ बैठक में इस बाबत आगे की रणनीति का खाका खींचा जाएगा।