सेवानिवृत आईएएस देवेंद्र दुबे की पत्नी मोहिनी दुबे (58) की हत्या कर लूट की वारदात का पुलिस ने मंगलवार को खुलासा कर दिया। पुलिस ने देवेंद्र के दोनों ड्राइवर भाइयों और उनके एक साथी को गिरफ्तार किया। अखिलेश वारदात का मास्टरमाइंड है। वह और उसका भाई 13 साल से देवेंद्र के घर पर काम कर रहे थे। आरोपियों ने एक करोड़ रुपये के जेवरात लूटे थे। पुलिस ने जेवरात बरामद कर लिए हैं। वारदात की फुटेज किसी को न मिलें, इसलिए बदमाश डीवीआर व सीसीटीवी कैमरे उखाड़ कर ले गए थे। इन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया।
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Retired IAS wife murder
- फोटो : अमर उजाला
इंदिरानगर सेक्टर-20 निवासी सेवानिवृत आईएएस देवेंद्र दुबे 25 मई की सुबह ड्राइवर रवि यादव के साथ गोल्फ खेलने गए थे। उनके जाने के बाद घर के भीतर बदमाशों ने उनकी पत्नी मोहिनी की हत्या कर जेवरात लूट ले गए थे।
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संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध आकाश कुलहरि ने बताया कि वारदात में रवि व उसके ड्राइवर भाई अखिलेश यादव और साथी रंजीत को गिरफ्तार किया गया है। वारदात के दिन अखिलेश और रंजीत स्कूटी से देवेंद्र के घर पहुंचे थे। दोनों ने मोहिनी की गला कसकर हत्या कर दी थी और जेवरात लूटकर भाग गए थे। वारदात की साजिश में रवि भी शामिल था।
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पैर छुए, फिर पेंचकस से वार कर कस दिया गला
अखिलेश ने पुलिस को बताया कि उसके घंटी बजाने पर मोहिनी ने दरवाजा खोला। वह बोला, उसके दोस्त रंजीत को मदद की जरूरत है। नौकरी चाहिए। इस पर मोहिनी ने कहा, उसे बुला लाओ। अंदर आकर दोनों ने उनके पैर छुए। फिर अचानक रंजीत ने पेंचकस से मोहिनी पर वार कर दिए और अखिलेश ने दुपट्टे से गला कसना शुरू किया। जब सांसें थम गईं तब दुपट्टा छोड़ा। फिर जेवरात बैग में भरे और स्कूटी से भाग निकले।
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भागने की कोशिश की, पुलिसकर्मी भी जख्मी
संयुक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक, पूछताछ में अखिलेश ने बताया कि उसने गहनों से भरा बैग कुकरैल बंधे के पास झाड़ियों में छिपाया है। पुलिस की एक टीम दोपहर करीब एक बजे उसको लेकर बंधे के पास जंगल में ले गई। इसी दौरान उसने अपना बैग उठाया और उसमें से तमंचा निकालकर फायर कर दिया। वहां से भागने की कोशिश की। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई कर उसको गिरफ्तार किया। मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गया।
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जेवरात के होने थे तीन हिस्से
अखिलेश वारदात का मास्टरमाइंड है। वह और उसका भाई दोनों 13 साल से देवेंद्र के घर पर काम कर रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि लूटे गए जेवरात के तीन हिस्से होने थे। अखिलेश, रवि और रंजीत के बीच हिस्से बंट जाते। मगर उसके पहले ही पुलिस ने धरकपड़ शुरू कर दी। इसलिए बंटवारा नहीं हो सका था। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर भी लिया जाएगा। बरामद बैग से डीवीआर भी बरामद हुई है। वारदात के बाद बदमाश फुटेज किसी को न मिलें, इसलिए डीवीआर व सीसीटीवी कैमरे उखाड़ कर ले गए थे।
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12 घंटे में मिले अहम सुराग... 24 घंटे में पहचान, 78 घंटे में खुलासा
25 मई
सुबह 7.30 से 9.30 के बीच मोहिनी की घर में घुसकर हत्या व लूटपाट हुई।
पोस्टमार्टम के बाद मोहिनी का अंतिम संस्कार किया। शाम तक साफ हो गया कि वारदात में घर का कोई करीबी ही शामिल था।
सीसीटीवी में नीले रंग की स्कूटी सवार दो संदिग्ध दिखे।
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26 मई
फुटेज में दिख रहे दोनों युवकों की पहचान का प्रयास शुरू।
शाम तक स्कूटी के जरिये पुलिस ने आरोपी रंजित की पहचान की।
सीसीटीवी फुटेज की संख्या बढ़ी तो पता चला कि रंजीत के साथ हेलमेट लगाया युवक अखिलेश है।
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27 मई
पुलिस ने रंजित और अखिलेश के घर दबिश दी, पर दोनों हाथ नहीं लगे।
पुलिस ने रंजित के भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ की। दोनों के बारे में अहम सुराग मिला।
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28 मई
पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम रंजीत, अखिलेश की तलाश में लगी, दोपहर को दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
पूछताछ में अखिलेश के भाई रवि के भी वारदात में शामिल होने का पता चला। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार किया।
सामान बरामदगी के दौरान अखिलेश ने पुलिस टीम पर किया फायर। जवाबी फायरिंग में अखिलेश घायल।
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39 पुलिसकर्मी, तीन टीमें और 5 अफसरों की रही भूमिका
वारदात के खुलासे को तीन टीमें लगाई गई थीं। एक इंस्पेक्टर क्राइम शिवानंद मिश्रा ने, दूसरी गाजीपुर इंस्पेक्टर विकास राय ने और तीसरी ने डीसीपी उत्तरी की क्राइम टीम के सब इंस्पेक्टर विश्वनाथ प्रताप की अगुवाई में तफ्तीश की।
तीनों टीमों में इंस्पेक्टर, दरोगा व सिपाही समेत 39 पुलिसकर्मी थे। संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध आकाश कुलहरि, डीसीपी पूर्वी प्रबल प्रताप सिंह, डीसीपी नॉर्थ अभिजीत आर शंकर, एडीसीपी मुख्यालय राघवेंद्र सिंह व एसीपी गाजीपुर विकास राय ने तीनों टीमों की कार्रवाई की निगरानी की।