मेहरुन्निशा
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पहले लोग हंसते थे, अब लेते हैं सलाह
चित्रकूट जिले के मछलीमंडी निवासी मेहरुन्निशा को दो साल पहले लगातार खांसी आने लगी। जांच में टीबी की पुष्टि हुई तो परिवार और पड़ोस के लोग हिकारत भरी निगाह से देखने लगे। वह डाट्स पर गईं और वहां से नियमित दवाएं लेने लगीं। मई 2018 की जांच में उन्हें टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया। उन्होंने टीबी मरीजों का दर्द सुनकर संकल्प लिया था कि बच गईं तो दूसरों को मरने नहीं दूंगी। अब मानिकपुर पहाड़ी पर रहने वाले टीबी मरीजों के बीच काम कर रही हैं। उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने टीबी चैंपियन के नाम से सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने अपना दायरा बढ़ाया। पहाड़ तोड़ाई के काम में लगे मजदूरों की हर तीन से चार माह में डाट्स ले जाकर जांच कराती हैं। मेहरुन्निशा बताती हैं कि शुरुआती दौर में उनके काम पर लोग हंसते थे, लेकिन अब सलाह लेने आते हैं।