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देश सेवा के लिए बेटियों ने दिखाया दम, कुछ बेहोश होकर गिरीं, देखें- तस्वीरें

Fri, 13 Sep 2019 04:52 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
देश सेवा का जज्बा और हौसलों की उड़ान का सपना लेकर सेना पुलिस में भर्ती होने आईं बेटियों ने बृहस्पतिवार को खूब पसीना बहाया। राजधानी के एएमसी सेंटर में चल रही तीन दिवसीय भर्ती रैली के पहले दिन जोश, जुनून और आत्मविश्वास से भरीं 600 बालिकाओं ने शारीरिक दक्षता परीक्षा पास करने के लिए खूब जोर आजमाइश की।
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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
दरअसल, देश में पहली बार सेना पुलिस में सैनिक जीडी के पदों के लिए भर्ती रैली आयोजित की गई है। इसमें शामिल होने के लिए छावनी स्थित सेना चिकित्सा कोर केंद्र एवं कॉलेज (एएमसी) के स्टेडियम में बृहस्पतिवार सुबह चार बजे ही बालिकाएं पहुंच गई थीं।
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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
पहले दिन सेना ने लखनऊ व कानपुर समेत 41 जिलों की 1,884 बालिकाओं को ऑनलाइन प्रवेश पत्र जारी किए, जिनमें से 600 बालिकाएं ही रैली में शामिल हुईं। स्टेडियम में पहुंचने पर अकादमी से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश पत्र देखकर उन्हें टोकन नंबर दिए गए। लंबाई मांपने के बाद सौ-सौ बालिकाओं के ग्रुप बनाकर उन्हें 400 मीटर राउंड वाले ट्रैक पर दौड़ाया गया।

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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
ट्रैक के चार राउंड 7:30 मिनट में पूरा करने वाली बालिकाओं को ग्रुप एक और साढ़े सात से आठ मिनट में पूरा करने वाली अभ्यर्थियों को ग्रुप दो में रखा गया। रनिंग में ही अधिकतर अभ्यर्थियों की छंटनी हो गई।
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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
सफल अभ्यर्थियों के हाथ पर मुहर लगाकर बॉयोमीट्रिक पंजीकरण किया गया। इसके बाद दस फीट की लॉन्ग और तीन फीट की हाइट जंप कराई गई, जिसमें हर प्रतिभागी को अधिकतम तीन मौके दिए गए।
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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
पहले राउंड में इन जिलों को मिला मौका
अमेठी, अंबेडकर नगर, प्रयागराज, बस्ती, फैजाबाद, कुशीनगर, कौशांबी, महाराजगंज, प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर, अयोध्या, बरेली, बदायूं, संभल, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, फर्रुखाबाद, बलरामपुर, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, औरैया, बाराबंकी, कन्नौज, गोंडा, बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, लखनऊ, उन्नाव, महोबा और चित्रकूट की अभ्यर्थी शामिल हुईं ।
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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
सफल अभ्यर्थियों का 15 से होगा मेडिकल
उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के लिए अलग-अलग जिलों की अभ्यर्थियों के लिए दौड़ व जंप कराई जाएंगी। इसमें सफल होने वाली अभ्यर्थियों का मेडिकल 15 सितंबर से होगा। इसमें पास होने वाली बालिकाओं की लिखित परीक्षा अक्तूबर में होगी।

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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
आज इन जिलों की होगी भर्ती
उत्तर प्रदेश के बागपत, बिजनौर, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, अमरोहा, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, रामपुर, हापुड़, मैनपुरी, एटा, इटावा, झांसी, जालौन, ललितपुर, आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, हाथरस, कासगंज और मथुरा की अभ्यर्थी रैली में शामिल होंगी।

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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
दौड़ के दौरान गश खाकर गिरीं कुछ अभ्यर्थी
आठ मिनट में 16 सौ मीटर का राउंड पूरा करने के चक्कर में कुछ अभ्यर्थी गश खाकर गिर गईं। इन्हें तत्काल महिला पुलिस ने सहारा दिया। हाइट जंप में भी किसी ने बाधाएं पार कीं तो कोई असफल रहा। इसी बीच एक अभ्यर्थी ने जंप से पहले गद्दा हटाने की मांग की तो गद्दे हटवाकर जंप कराई गई।

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भर्ती रैली - फोटो : amar ujala
सड़क पर ही डटे रहे अभिभावक
भर्ती रैली में शामिल होने के लिए बालिकाएं बुधवार रात को ही अभिभावकों के साथ राजधानी आ गई थीं। अभ्यर्थी स्टेडियम में चली गईं और अभिभावक सड़क किनारे इंतजार में बैठे रहे। इससे सेंटर के बाहर खासी भीड़ हो गई। असफल अभ्यर्थियों से चारबाग जाने के लिए ऑटो वालों ने मनमाने दाम वसूले।

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निशि देवी और रुचि यादव - फोटो : amar ujala
देश ही सर्वोपरि
मेरे लिए देश सेवा की सबकुछ है। पहले मैं आरपीएफ के लिए तैयारी कर चुकी हूं, जिसे लगातार बनाए हुए थी और मिलिट्री पुलिस की भर्ती आई तो यह इसमें काम आ गई। अपने सपनों को पूरा करने के लिए अब सही मुकाम मिलेगा। पिता बिंदादीन किसान हैं, जिन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया। - निशी देवी, उन्नाव
नानी ने बढ़ाया हौसला

पापा उदयपाल यादव पेशे से किसान हैं। मैं नानी के घर पर रहती हूं। जब मैंने 58 साल की नानी को बताया कि मिलिट्री पुलिस में लड़कियों की भर्ती निकली तो उनकी आंखें चमक उठीं। उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाय। जब मैं दौड़ने जाती थी तो वह भी मेरे साथ होती थीं। -रुचि यादव, रायबरेली

 

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प्रिया और निधि - फोटो : amar ujala
देशप्रेम से ओतप्रोत है घर
एनसीसी कैडेट रही हूं। सी सर्टिफिकेट है। इसलिए फिजिकल की तैयारी को लेकर कोई घबराहट नहीं थी। पापा आर्मी से रिटायर हैं और भैया आर्मी में ही हैं। सुबह हम और भैया साथ में ही दौड़ने जाते थे। देशप्रेम का माहौल बचपन से ही मिला है। - प्रिया, इलाहाबाद
पापा हैं मेरी असली ताकत

बीएससी सेकेंड ईयर में हूं। पिता किसान हैं और परिवार में दो भाई व दो बहनें हैं। बहन रेलवे में क्लर्क है। गांव में मैं जब दौड़ने जाती थी तो पापा मेरा हौसला बढ़ाते थे। वह लगातार मेरी टाइमिंग चेक करते थे और खानपान पर ध्यान देते थे। - निधि सिंह परिहार, कानपुर
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बबिता और रोशनी - फोटो : amar ujala
स्पोर्ट्स से मिली मदद
पापा पेशे से किसान हैं। कुछ अलग करने के लिए पापा ने मुझमें खेलों के प्रति रुचि जगाई। इसके बाद मैंने ट्रैक पर काफी पसीना बहाया। यही मेहनत आज सेना भर्ती रैली में काम आई। अब बस सेना में शामिल होकर देश के लिए कुछ कर गुजरने का ख्वाब है। - बबीता सिंह, रायबरेली
ट्यूशन पढ़ाकर यहां तक पहुंची हूं

मेरा सेना में जाने का सपना बचपन से ही रहा है पर, जब पापा को पैरालाइसिस का अटैक पड़ा तो जिम्मेदारियों का एक बोझ मुझ पर आ गया। भाई व बहन की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने के लिए मैं ट्यूशन पढ़ाती हूं। भर्ती के लिए कड़ी मेहनत भी की है। -रोशनी साहू, लखनऊ

 
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