राम मंदिर चढ़ावा चोरी में एसआईटी रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। एसआईटी रिपोर्ट में निगरानी के नियम कमजोर करने का जिक्र है, चंपत राय और गोपाल का जिक्र नहीं है। अनिल मिश्रा और टिन्नू यादव की मुख्य भूमिका मानी गई है। साथ ही यह भी सामने आया है कि 27 अप्रैल से पहले भी चोरी होती रही। 70 बार चोरी कैमरे में कैद हुई है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी रिपोर्ट सामने आ गई है। इसके मुताबिक, गणना प्रक्रिया की निगरानी के नियमों को ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बदलकर कमजोर कर दिया। रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की लापरवाही और चोरी में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की मुख्य भूमिका बताई गई है। वहीं, रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल राव का कहीं भी जिक्र नहीं है।
मंदिर परिसर में सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में रखी गई एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक 6 फरवरी 2025 को गणना प्रक्रिया की निगरानी को लेकर एसओपी तैयार की गई थी। इसमें तय किया गया था कि गणना कक्ष में किस-किसकी आवाजाही रहेगी, गणनाकर्मियों की एंट्री कब होगी और वे कैसे कपड़े पहनेंगे। गणना प्रक्रिया के पहले और बाद में कर्मियों की तलाशी भी होगी, लेकिन निगरानी नियमों को शिथिल कर दिया गया।
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राम मंदिर में प्रवेश करती एसआईटी की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपियों ने इसका फायदा उठाकर रकम पार की। रिपोर्ट में लिखा गया है, यह चिंता व जांच का विषय है कि पदाधिकारियों ने किन परिस्थितियों में ये बदलाव किए? रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल नगरकोटे का जिक्र नहीं होने पर सवाल उठा रहा है कि क्या एसआईटी ने उनको क्लीन चिट दे दी है या विस्तृत जांच में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा
- फोटो : PTI
वहीं, अनिल मिश्रा की भूमिका पर लिखा है कि उन्हें दान व चढ़ावा प्रबंधन की जिम्मेदारी 20 सितंबर 2024 को दी गई थी। उन्हें गणना प्रक्रिया की निगरानी कर प्रभावी पर्यवेक्षण करना था जो नहीं किया गया। इसलिए उनको दोषी पाया गया है।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
27 अप्रैल से पहले भी होती रही चोरी, 70 बार चोरी कैमरे में कैद
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा गणना कक्ष में हुई चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। यह रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की गई। एसआईटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा की गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की घटनाएं हुईं।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
27 अप्रैल से पहले भी चोरी और गबन होता रहा, लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन संभव नहीं हो सका। आरोपियों के बयान और बैंक खातों में मिली आय से अधिक धनराशि से यह संकेत मिले हैं।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में गणना कर्मियों की ओर से करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं दर्ज मिलीं। रिपोर्ट में न केवल चोरी और गबन की घटनाओं की पुष्टि की गई है, बल्कि ट्रस्ट, बैंक, गणना कक्ष की निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है, जबकि विस्तृत जांच अभी जारी है।
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जांच के लिए पहुंची एसआईटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसआईटी ने पाया कि चोरी इसलिए संभव हुई क्योंकि निर्धारित सुरक्षा उपायों का प्रभावी पालन नहीं किया गया। प्रवेश और निकास पर तलाशी, निर्धारित वेशभूषा, निजी सामान पर प्रतिबंध, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण और प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं व्यवहार में लागू नहीं थीं। ट्रस्ट और बैंक दोनों के प्रतिनिधि मौजूद रहते थे, फिर भी अपराध लगातार होता रहा।
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एसआईटी की टीम।
- फोटो : अमर उजाला।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 सितंबर 2024 को ट्रस्ट और बैंक के बीच हुई सहमति में गणना कक्ष में आने-जाने वालों के लिए सख्त व्यवस्था थी। लेकिन छह फरवरी 2025 को जारी एसओपी में अनिवार्य तलाशी की व्यवस्था बदलकर नियमित अथवा रैंडम तलाशी कर दी गई।
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रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
एसआईटी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों पर एफआईआर की संस्तुति की थी। इसके अलावा एसआईटी ने गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, गणना कक्ष में मौजूद अन्य पर्यवेक्षणीय कर्मियों तथा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की संस्तुति की है।
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महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
डॉ. अनिल मिश्रा पर सवाल, सुभाष श्रीवास्तव प्रमुख रूप से जिम्मेदार
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ मिलकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। एसओपी लागू होने के बाद उनकी जिम्मेदारी थी कि उसका अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें और लगातार समीक्षा करें, लेकिन सतत निगरानी, प्रभावी पर्यवेक्षण और अनुश्रवण का अभाव स्पष्ट रूप से सामने आया।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
एसआईटी के अनुसार ट्रस्ट की ओर से नियुक्त गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की जिम्मेदारी थी कि सुरक्षा व्यवस्था लागू रहे। चोरी की सभी घटनाएं गणना कक्ष में हुईं और नियमित तलाशी नहीं होने देना चोरी का प्रमुख कारण बना। इसलिए उन्हें प्रमुख रूप से उत्तरदायी माना गया है।
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टिन्नू यादव को ले जाते पुलिसकर्मी।
- फोटो : amar ujala
रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका संदिग्ध
रिपोर्ट के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास मंदिर परिसर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई लिखित अथवा औपचारिक प्राधिकार जारी नहीं किया गया था। एसआईटी ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव की गणना ड्यूटी में सिफारिश की, जिससे उसे कथित गबन का अवसर मिला।
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आरोपी रमाशंकर यादव टिन्नू के आवास पर मौजूद पुलिस बल।
एसआईटी ने कहा कि यदि ट्रस्ट की ओर से नियुक्त कर्मचारी गणना के समय सीसीटीवी फुटेज पर सतर्क निगरानी रखते तो चोरी की घटनाएं रोकी जा सकती थीं। गणना जैसा संवेदनशील कार्य होने के बावजूद केवल 45 दिन का सीसीटीवी बैकअप रखा जाता था, जबकि ऑडिट रिपोर्ट में 180 दिन तक फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी, जिसका पालन नहीं हुआ।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
बैंक अधिकारियों की भी गंभीर लापरवाही
रिपोर्ट में बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। बैंक की ओर से गणना कर्मियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई। बैंक प्रतिनिधि गणना के समय मौजूद रहते थे, लेकिन निगरानी प्रभावी नहीं रही। अधिकारियों के मासिक रोटेशन का भी पालन नहीं किया गया। एसआईटी ने माना कि बैंक स्तर पर भी निर्धारित एसओपी के दायित्व पूरे नहीं किए गए।
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राम मंदिर
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
एसआईटी ने कहा-जांच अभी जारी
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट के अंत में कहा है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। जांच अभी प्रचलित है। अंतिम रिपोर्ट में पर्यवेक्षणीय विफलताओं, प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत खामियों और सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत की जाएंगी।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में मौजूद अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व अन्य ट्रस्टी
- फोटो : ट्रस्ट
चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट सख्त, बोले- दोषियों को मिले कठोरतम दंड
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में चढ़ावा गणना में सामने आई अनियमितताओं पर गहन मंथन हुआ। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कठोरतम कार्रवाई कराई जाएगी। बैठक में महामंत्री और एक न्यासी के त्यागपत्र, अंतरिम व्यवस्थाओं तथा हालिया घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई।
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प्रेसवार्ता में जानकारी देते कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी, साथ में डॉ. कृष्ण मोहन
- फोटो : अमर उजाला
बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में ट्रस्ट ने कहा कि दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना में अनियमितता सामने आने से सभी न्यासी आहत और चिंतित हैं। मामले की जानकारी मिलते ही ट्रस्ट ने प्रारंभिक तथ्य जुटाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, जिसके बाद शासन ने तत्काल उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन किया।
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर से ट्रस्ट की बैठक कर बाहर निकलते ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नित्य गोपाल दास
- फोटो : अमर उजाला
ट्रस्ट ने कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच में आठ लोगों के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया और गिरफ्तारियां भी हुईं। अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर से ट्रस्ट की बैठक में जाते महंत कमल नयन दास।
- फोटो : अमर उजाला
ट्रस्ट ने अपील की कि यदि किसी व्यक्ति, संस्था या पत्रकार के पास मंदिर से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय सीधे एसआईटी या जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई हो सके।
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राम मंदिर के आद्य शंकराचार्य द्वारा से बाहर निकलते ट्रस्ट के पदाधिकारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बैठक में ट्रस्ट ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस प्रकरण का उपयोग श्रीराम जन्मभूमि, रामलला मंदिर और हिंदू आस्था को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं तथा बिना साक्ष्य के आरोप लगाकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई है।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में मौजूद अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व अन्य ट्रस्टी
- फोटो : ट्रस्ट
ट्रस्ट ने अपने छह वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में भव्य राम मंदिर का निर्माण, मुख्य मंदिर और परकोटे के सभी मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण तथा श्रीराम यंत्र की स्थापना जैसे ऐतिहासिक कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं।
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अयोध्या का राम मंदिर।
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31 मार्च तक रामलला को मिला 582 करोड़ का चढ़ावा
ट्रस्ट के अनुसार 31 मार्च 2026 तक रामलला को कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ। इसमें से 391 करोड़ रुपये संचालन व्यय पर खर्च किए गए हैं। वहीं निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान से प्राप्त 3264 करोड़ रुपये में से 2370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण एवं पूंजीगत कार्यों पर व्यय किए जा चुके हैं। शेष राशि ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित है। ट्रस्ट ने दावा किया कि वित्तीय विवरण समय-समय पर सार्वजनिक किए जाते रहे हैं।
कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा पूरा मामला
ट्रस्ट ने कहा कि एसआईटी का कार्य केवल दोषियों की पहचान तक सीमित नहीं है। जांच दल यह भी सुझाव देगा कि ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में कौन-कौन से सुधार किए जाएं, जिससे चढ़ावा गणना और वित्तीय प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी तथा जवाबदेह बन सके। ट्रस्ट ने दोहराया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।