प्रतीकात्मक तस्वीर
मसलन, लखनऊ मेल, शताब्दी, हमसफर, गोमती एक्सप्रेस, एसी एक्सप्रेस तक में शिकायतें आती हैं और उन पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। 180 से अधिक ट्रेनें ऐसी हैं, जिसमें शिकायतों के अंबार लगते जा रहे हैं। रेलवे इन ट्रेनों से अपनी जेबें तो भर रही है, लेकिन कमाई का कुछ हिस्सा भी सुविधाओं पर खर्च किया जाता तो यात्रियों को राहत हो जाती। डीआरयूसीसी सदस्य एसएस उप्पल ने बताया कि रेलवे जब यात्रियों से कमाई कर रहा है तो यह उसकी ड्यूटी बनती है कि उनकी शिकायतों को जड़ से समाप्त कर दिया जाए। रेलवे तमाम तामझाम करती है, लेकिन ट्रेनों की समयसारिणी सुधारने पर फोकस नहीं है। टाइम सुधर जाए तो आधी समस्याएं खुद हल हो जाएंगी।