घुंघरु पहनकर शानदार सुरीली परफॉर्मेंस देने के लिए दुनियाभर में मशहूर इंडियन ओशियन के रघु दीक्षित लखनऊ के सनतकदा फेस्टिवल में उतरे, तो़ लड़कियां दिल दे बैठीं।
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घुंघरु वाले इस सिंगर को दिल दे बैठीं लड़कियां
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रघु अपने बैंड के साथ जब स्टेज पर आए तो सभी ने तालियों और सीटियों से उनका स्वागत किया। फिर शुरू हुआ गाना-बजाना। धीरे-धीरे सभी अपनी सीटें छोड़कर मंच के आगे आ गए।
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गायक, संगीतकार और प्रोड्यूसर रघु ने गानों की शुरुआत ‘जग चंगा...’ से की। उसके बाद अपने गुरु का लिखा कन्नड़ गीत सुनाया।
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रघु की मेलोडी मानो जैसे लोगों के दिलों में उतर गई-‘अम्बर से मिलते हैं कदमों के निशां.. तेरे ही हर शाम..’। ‘यादों की क्यारी’ कविता के जरिए बचपन की यादों में ले गए।
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उन्होंने ‘छुपा-छुपी अंखियां खोलों ना, गुनगुनी डुबकी ले लो ना...’ गीत सुनाया। रघु ने अपना लोकप्रिय गाना ‘मस्ती की बस्ती में ही, जिंदगी ये हंसती है...’ सुनाया तो सभी मंच के आगे झूमने लगे।
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रघु अपने एक से एक हिट गाने सुनाते रहे और लोग मस्ती के साथ उन्हें सुनते रहे। उन्होंने ‘ये दिल को संभालूं कैसे, तन्हाई में डूबी रात है..’, ‘रात के अंधेरे में... सुनाया, तो लोग डूब से गए।
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रघु दीक्षित के साथ उनके बैंड में गिटार पर गौरव, स्टीफेन लुइस, वायलिन पर आदर्श राम कुमार, बांसुरी पर चंद्रमणि और ड्रम पर एंटनी कमल ने उनका साथ दिया।
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रघु और गाते रहे और लोग ‘वंस मोर.. वंस मोर..’ कहते हुए झूमते रहे।
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रघु ने जितनी शिद्दत से परफॉर्मेंस दी, लोगों ने भी उन्हें उसी तरह सुना।