कवि जोशी ने मौजूदा हालात पर पढ़ा, जो इस पागलपन में शामिल नही होंगे, मारे जाएंगे। कठघरे में खड़े कर दिए जाएंगे, जो विरोध में बोलेंगे, जो सच बोलेंगे, मारे जाएंगे। उन्होंने कविता प्रतीक्षा और उल्लंघन से भी मौजूदा हालात पर सवाल उठाया। राजेश जोशी ने व्याख्यान में मौजूदा हालात को क्रूर होने के साथ हास्यास्पद बताया। कहा कि अभिव्यक्ति पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव है। कवि के अंदर के भाव बाहर नहीं आ पा रहे हैं।