संक्रमित मरीज के बाद अब आम लोगों में एंटीबॉडीज के विकसित होने का पता पीजीआई व केजीएमयू लगाएंगे। दरअसल तर्क दिया जा रहा है कि समुदाय में संक्रमण फैलने से कई लोग बिना इलाज ठीक हो रहे हैं। इस पर शोध की जिम्मेदारी भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने पीजीआई व केजीएमयू को दी है। पांच राज्यों से आने वाले 15 हजार नमूनों में एंटीबॉडीज की जांच करेंगे। पीजीआई के ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रो. अनुपम वर्मा ने बताया कि यूपी के अलावा मुंबई, कोलकाता, जम्मू और मणिपाल से ब्लड सैंपल आएंगे। साथ ही केजीएमयू व पीजीआई ब्लड बैंक में रक्तदान करने आए लोगों के खून में भी एंटीबॉडीज को तलाशेंगे। एंटीबॉडीज मिलने पर इस खून का उपयोग कोरोना संक्रमितों के उपचार में होगा।
विज्ञापन
2 of 5
COVID-19 antibody
- फोटो : ANI
केजीएमयू ब्लड बैंक में हर रोज करीब 200 से 250 डोनर आते हैं। जबकि पीजीआई में करीब 50 से 60 डोनर आते हैं। डोनर के खून में कोविड एंटीबॉडीज की पुष्टि के लिए कोविड इम्यूनोग्लोविन-जी एंटीबॉडीज टेस्ट कराया जाएगा। इस जांच में आने वाला खर्च संस्थान खुद वहन करेगा। जांच से यह साफ होगा कि कोरोना वायरस का संक्रमण कम्युनिटी में कितना फैला है। वहीं, बिना दवा खाए ही ठीक हुए लोगों का आंकड़ा भी साफ होगा। इसके अलावा लोगों में वायरस से लड़ने की क्षमता कितनी विकसित हुई है, इसका भी पता चलेगा। अफसरों का कहना है कि दो से तीन दिन में जांच शुरू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
3 of 5
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
आठ सौ रुपये आएगा जांच का खर्च
केजीएमयू की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. तुलिका चंद्रा ने बताया कि आईसीएमआर के निर्देश पर होने वाली एंटीबॉडीज की जांच में करीब आठ सौ रुपये खर्च आएगा। इसकी मशीन संस्थान में उपलब्ध है। जांच किट भी मिल गई है। जांच जल्द शुरू की जाएगी।
4 of 5
antibody Tests
- फोटो : Pixabay
पासपोर्ट की तरह काम करेगी कोविड एंटीबॉडीज की रिपोर्ट
बिना दवा खाए ही कोरोना को मात देने वालों की जांच में एंटीबॉडीज मिलती है तो इनमें संक्रमण दोबारा होने की संभावना बहुत कम रहती है। एंटीबॉडीज बनने की रिपोर्ट एक पासपोर्ट की तरह काम करेगी। इस रिपोर्ट के जरिए वे किसी भी देश में जा सकेंगे। अभी यह शोध रहा है कि कोविड एंटीबॉडीज कितने समय तक शरीर में बनी रहती है।
केजीएमयू की ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. तुलिका ने बताया कि एंटीबॉडीज मिलने वाले डोनर के खून का उपयोग कोरोना मरीजों के इलाज में भी किया जाएगा। इससे प्लाज्मा थेरेपी में भी मदद मिलेगी।