रोजाना हजारों मरीजों का इलाज करने वाला केजीएमयू मंगलवार को रेजीडेंट डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से आठ घंटे तक कराहता रहा। सुबह आठ से शाम चार बजे तक काम बंद होने से विभिन्न विभागों में सौ से अधिक ऑपरेशन टल गए। वहीं, करीब आठ हजार मरीजों को ओपीडी में उपचार नहीं मिला। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं चलती रहीं। दिनभर की मान-मनौव्वल के बाद रेजीडेंट को आश्वासन दिया गया कि दो माह में उनकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। इस पर वे शाम चार बजे के बाद काम पर लौटे। इसके साथ केजीएमयू प्रशासन की सांस में सांस आई।
विज्ञापन
2 of 8
कार्य बहिष्कार से परेशान मरीज
- फोटो : amar ujala
केजीएमयू के रेजीडेंट डॉक्टर एसजीपीजीआई के समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने मंगलवार को कार्य बहिष्कार का एलान किया था। सुबह जब न्यू ओपीडी मरीजों से भरी थी, रेजीडेंट वहां से और वॉर्डों से निकल गए। हालांकि डॉक्टर मरीजों के उपचार में लगे होने का दावा करते रहे, लेकिन रेजीडेंटों के न होने का असर साफ दिखा। सैकड़ों मरीजों को गेट से ही लौटा दिया गया तो कुछ इंतजार करने के बाद भी बारी नहीं आती देख खुद लौट गए।
विज्ञापन
3 of 8
केजीएमयू के रेजीडेंट्स ने काम बंद कर प्रदर्शन किया
- फोटो : amar ujala
हालत यह थी कि दोपहर एक बजे तक ज्यादातर विशेषज्ञ 25 से 30 मरीज ही देख पाए थे, जबकि बाहर डेढ़ सौ से ज्यादा की भीड़ थी। इसी तरह विभिन्न वॉर्डों में नर्सिंग स्टाफ ने कमान संभाल रखी थी, लेकिन उचित दवाएं न मिलने से मरीज कराहते नजर आए।
4 of 8
केजीएमयू
- फोटो : amar ujala
गंभीर मरीजों के ही हुए ऑपरेशन
केजीएमयू के विभागों में करीब 35 ऑपरेशन थियेटर हैं। यहां रोजाना छोटे व गंभीर 100 से 120 ऑपरेशन होते हैं। लेकिन मंगलवार को रेजीडेंट्स के काम बंद कर प्रदर्शन करने से ज्यादातर विभागों में ऑपरेशन टाल दिए गए। कुछ जगह गंभीर मरीजों के दो से तीन ऑपरेशन ही हुए। सर्जरी विभाग में चार ओटी है। यहां करीब 30 ऑपरेशन रोजाना होते हैं, लेकिन मंगलवार को सिर्फ चार ही हो सके। प्लास्टिक सर्जरी विभाग में दोपहर एक बजे तक एक भी ऑपरेशन नहीं हो सका। एक मरीज की हालत गंभीर होने पर शाम करीब चार बजे ऑपरेशन किया गया। पीडियाट्रिक विभाग में 12 ऑपरेशन होने थे, लेकिन एक भी नहीं हुआ। इसी तरह यूरोलॉजी में एक भी ऑपरेशन नहीं किया गया। कार्डियोलॉजी में आमतौर पर पांच से आठ ऑपरेशन होते हैं, लेकिन यहां सिर्फ दो ऑपरेशन ही हो सके।
विज्ञापन
5 of 8
हड़ताल से परेशान मरीज
- फोटो : amar ujala
एस्सा का डर दिखाने से और बिगड़ गई बात
कार्य बहिष्कार के बाद कलाम सेंटर पर जुटे रेजीडेंट्स का आरोप है कि चिकित्सा अधीक्षक ने उनकी बात सुनने के बजाय धमकाया। रेजीडेंट डॉक्टरों को समझाने के लिए सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के साथ एमएस डॉ. वीके ओझा भी पहुंचे। रेजीडेंट्स की मानें तो उन्होंने बात सुनने के बजाय एस्मा का डर दिखाया। यह भी कहा न्यू ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। यदि किसी की जान गई तो तुम लोगों को जेल जाना पड़ सकता है। इससे गुस्साए रेजीडेंट्स काम पर लौटने के बजाय वेतन भत्ता बढ़ाने का आदेश मांगने लगे। रेजीडेंट्स का यह भी आरोप है कि उन्हें सेल्वी हॉल में बातचीत के लिए बुलाया गया, लेकिन वहां भी बार-बार धमकी दी गई। हालांकि रेजीडेंट्स मांगों पर अड़े रहे। ऐसे में कुलपति ने बीच का रास्ता निकाला और सीएमएस के साथ उन्हें प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे के पास भेजा।
विज्ञापन
6 of 8
मरीज बेहाल
- फोटो : amar ujala
लिंब सेंटर में भर्ती बंद, ऑपरेशन टले
लिंब सेंटर में एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ। इसके अलावा पूरे दिन में एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि मरीजों की देखरेख करने वाले नहीं हैं। ऐसी स्थिति में भर्ती नहीं किया जा सकता। उधर, ओपीडी में सुबह से शाम तक मरीजों की कतार लगी रही। सीतापुर से पहुंचे रामसामुझ ने बताया कि उनके पैर का ऑपरेशन होना है, लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती करने से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
7 of 8
केजीएमयू
- फोटो : amar ujala
मांग इसलिए... रेजीडेंट को होगा 9 हजार का महीने का फायदा
मांग के मुताबिक वेतन भत्ता दिया गया तो हर रेजीडेंट को प्रतिमाह करीब नौ हजार रुपये का फायदा होगा। अभी जेआर प्रथम को करीब 63 हजार रुपये महीना मिलता है। नियमानुसार दूसरे और तीसरे साल तीन-तीन फीसदी की बढ़ोतरी होती है। रेजीडेंट की मांग के मुताबिक, सातवें वेतनमान के अनुसार सभी सुविधाएं दी गई हैं तो जेआर प्रथम वर्ष को करीब 72 हजार प्रतिमाह मिलेगा।
बड़ा सवाल : कार्य बहिष्कार का इंतजार कर रहा था ?
वेतन भत्ते बढ़ाने की रेजीडेंट दो साल से मांग कर रहे हैं। केजीएमयू प्रशासन से लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक को वे ज्ञापन दे चुके हैं। इस पर भी सुनवाई न हुई तो कार्य बहिष्कार की घोषणा माहभर पहले की गई थी। 28 अगस्त की तिथि का एलान भी कर दिया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या शासन इस कार्य बहिष्कार का इंतजार कर रहा था।
मरीज की स्थिति अनुसार होंगे ऑपरेशन
सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने कहा कि जिन मरीजों के ऑपरेशन मंगलवार को टाल दिए गए, अब उनकी स्थिति के अनुसार ऑपरेशन किया जाएगा। इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों को संदेश भेजा गया है। गंभीर मरीजों का ऑपरेशन बुधवार को होगा। इसके लिए रेजीडेंट्स ने भी सहयोग करने को कहा है। इस बीच ओपीडी में आने वाले नए मरीजों के ऑपरेशन की तिथि उनकी स्थिति के अनुसार आगे बढ़ा दी जाएगी। दो दिन में व्यवस्था सुधर जाएगी।
अब सभी सेवाएं चालू
रेजीडेंट्स का प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए कुलपति के पास गया। उन्होंने सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के साथ उसे शासन के पास भेजा। दो माह में समाधान दूर होने का आश्वासन दिया गया है। इस पर रेजीडेंट डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार वापस ले लिया। आकस्मिक सेवाएं नहीं रुकीं। कुछ विभागों की सर्जरी प्रभावित हुई है। विश्वविद्यालय में अब सभी सेवाएं चालू हो गई हैं। - डॉ. संतोष कुमार, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू