यूपी भाजपा अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी के साथ ही नए कप्तान का चुनौतियों से भरा सफर शुरू हो गया है। कुर्मी कार्ड यानी पिछड़ा, पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव यानी इन तीन फ्रंट पर पंकज चौधरी की सियासी परीक्षा होगी। आगे पढ़ें नए मुखिया के सामने क्या-क्या चुनौतियां होगीं?
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पंकज चौधरी के सिर सजा 'यूपी भाजपा अध्यक्ष' का ताज
- फोटो : अमर उजाला
राजधानी लखनऊ में आयोजित मेगा इवेंट में आधिकारिक एलान के साथ उत्तर प्रदेश भाजपा को नया नेतृत्व मिल गया है। महाराजगंज से सात बार के सांसद और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश भाजपा की कमान मिली है। देश के सबसे बड़े राज्य के पार्टी मुखिया के रूप में ताजपोशी हुई तो समर्थक गदगद हो उठे। लेकिन, इस ताजपोशी के साथ ही चौधरी का यूपी में चुनौतियों से भरा सफर भी शुरू हो गया है।
पूर्वांचल, पिछड़ा और संगठन को निशाने पर रखकर हुई ताजपोशी का सफर इतना आसान नहीं होने वाला है। वर्ष 2019 में 62 लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा 2024 में 36 सीटों पर सिमट गई। इसका कारण पार्टी कोर वोट बैंक 'कुर्मी' के पार्टी के छिटक जाना माना जा रहा है। इसका खामियाजा पार्टी को कई सीटों पर हार से भरना पड़ा। अब दोबारा कुर्मी वोट बैंक को पार्टी में लाना बड़ी चुनौतियों में से एक है।
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पंकज चौधरी के सिर सजा 'यूपी भाजपा अध्यक्ष' का ताज
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चौधरी के सामने ये होंगी चुनौतियां
भाजपा के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव में पिछड़े वोट बैंक को साधने की प्रमुख चुनौती होगी। वहीं पिछले कई साल से विभिन्न संस्थाओं में मनोनयन का इंतजार कर रहे नाखुश कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना भी बड़ी चुनौती होगी।
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पंकज चौधरी के सिर सजा 'यूपी भाजपा अध्यक्ष' का ताज
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इसके अलावा थाना, पुलिस और अधिकारियों के यहां सुनवाई न होने की शिकायत को दूर करने, सरकार के साथ संतुलन बनाए रखने जैसे तमाम ऐसे मुद्दे हैं, जिसे सुलझाना भी चौधरी के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। यह भी माना जा रहा है कि सात बार सांसद और केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद राज्य स्तर की राजनीति से तालमेल बिठाना भी चौधरी के सांगठनिक कौशल क्षमता की परख करेगा।
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यूपी भाजपा अध्यक्ष चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
कुर्मी वोट बैंक को भाजपा के पाले में लाना बड़ी चुनौती
दरअसल, यादवों के बाद पिछड़ों में सबसे अधिक प्रभावशाली रही कुर्मी बिरादरी भाजपा का कोर वोट बैंक रही है। लेकिन, पार्टी में तमाम कुर्मी नेताओं के होने और अपना दल (एस) के साथ होने के बाद भी 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा कुर्मी वोट बैंक में भारी सेंधमारी करने में सफल रही है।
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पंकज चौधरी के सिर सजा 'यूपी भाजपा अध्यक्ष' का ताज
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इस कारण भाजपा को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। 2019 में 62 लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा 2024 में 36 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। तभी से पार्टी नेतृत्व इस नुकसान की भरपाई के लिए एक ऐसे चेहरे को तलाश रही थी, जो कुर्मी वोट बैंक को फिर से अपने पाले में कर पाए।
पंकज चौधरी के सिर सजा 'यूपी भाजपा अध्यक्ष' का ताज
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कुर्मी कार्ड से 2027 की बिसात
पंकज चौधरी पर दांव लगाने की एक खास वजह यह भी मानी जा रही है कि मौजूदा सियासी परिदृश्य में यूपी में कुर्मी चेहरे के तौर पर मूल काडर के सिर्फ दो ही बड़े कुर्मी नेता हैं। इनमें एक खुद पंकज चौधरी और दूसरे जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह। हालांकि प्रदेश सरकार में वैसे तो कई अन्य कुर्मी नेता मंत्री और विधायक हैं, जिनमें से अधिकांश या तो दूसरे दलों से आए हैं या मूल काडर का होने के बावजूद कुर्मी समाज में उतने प्रभावी नहीं हैं, जितने पंकज चौधरी।