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ट्रेनों की लेटलतीफी से तीन साल में यात्री घटे, पर मालगाड़ियां भर रहीं खजाना, यहां देखें आंकड़ा

Mon, 06 May 2019 10:05 AM IST
ishwar ashish नीरज ‘अम्बुज’, अमर उजाला लखनऊ
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ट्रेनों की लेटलतीफी, असुरक्षित सफर, डिरेलमेंट, खराब एसी, बंद पंखे, गंदे शौचालय और उस पर ट्रेनों का बार-बार रद्द होना। ये कुछ ऐसी वजहें हैं, जिनसे नाराज 1.45 करोड़ यात्रियों ने तीन साल में उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल से मुंह मोड़ लिया है। इनमें से 57 लाख यात्री उत्तर रेलवे के स्टेशनों और 64 लाख पैसेंजर पूर्वोत्तर रेलवे के स्टेशनों पर कम हुए हैं।
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डेमो - फोटो : डेमो
बता दें, पटरियों की मरम्मत, डबलिंग, सिग्नलिंग व नॉन इंटरलॉकिंग के साथ स्टेशनों का कायाकल्प भी हो रहा है। ब्लॉक लेने ट्रेेनें रद्द व बदले रूट से चलाई जा रही हैं। तो कुछ ट्रेेनें ऐसी भी हैं, जो छह महीने से निरस्त हैँ। रेलवे इसे आधारभूत ढांचे में मजबूती के लिए जरूरी बता रहा है। पर, ट्रेनों की संचालन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से यात्री आजिज हो रहे हैं। नतीजतन, पैसेंजरों को संख्या लगातार कम हो रही है। पिछले तीन साल के आंकड़ों को देखें- वर्ष 2016-17 में उत्तर रेलवे में पैसेंजरों की संख्या 7.66 करोड़, जो 2018-19 में घटकर 7.09 करोड़ पहुंच गई। यही हाल पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के स्टेशनों पर भी है। वर्ष 2016-17 में 6.88 करोड़ पैसेंजर पहुंचे थे, जो 2018-19 में घटकर छह करोड़ हो गया। यानी 88 लाख पैसेंजर कम हो गए।
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ट्रेेनों से परेशान यात्री, फ्लाइट और बस का कर रहे रुख
रेलवे से नाराज पैसेंजर बस और फ्लाइट की ओर रुख कर रहे हैं। अमौसी एयरपोर्ट पर 2016-17 में 39.79 लाख यात्रियों ने उड़ान भरी थी, वर्ष 2018-19 में यह बढ़कर 53 लाख पहुंच गई है। इसमें घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के पैसेंजर शामिल हैं। उधर, परिवहन निगम की लग्जरी बसें स्कैनिया, वॉल्वो और जनरथ भी रेलयात्रियों को आकर्षित कर रही हैं। लखनऊ से संचालित ढाई सौ एसी बसें से सालाना एक लाख पैसेंजर यात्रा करते हैं।

 

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चारबाग रेलवे स्टेशन - फोटो : डेमो
इतने हैं स्टेशन
-198 रेलवे स्टेशन हैं उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में
-147 रेलवे स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे में

 
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उत्तर रेलवे व पूर्वोत्तर रेलवे से भले ही यात्रियों की संख्या कम हुई, पर रेलवे के खजाना पर इसका कोई असर नहीं है। क्योंकि माल ढुलाई और टिकट चेकिंग अभियानों से उसे अच्छी आमदनी हो रही है। उत्तर रेलवे ने वर्ष 2016-17 में मालभाड़े से 280 करोड़ रुपये और टिकट चेकिंग से 27 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। जबकि वर्ष 2018-19 में यह 320 करोड़ व 47 करोड़ हो गई है। इसी तरह पूर्वोत्तर रेलवे ने वर्ष 2016-17 में मालभाड़े से 96 करोड़ व टिकट चेकिंग से 34 करोड़ कमाए थे, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर क्रमश: 193 करोड़ व 42 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह रेलवे की आय इन तीन वर्षों में कुल 381 करोड़ रुपये बढ़ी, इसमें उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में 42 करोड़ व पूर्वोत्तर में 339 करोड़ रुपये रही है।
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धीरे-धीरे घटता गया यात्रियों का आंकड़ा
उत्तर रेलवे

   वर्ष           यात्री की संख्या            आय
2016-17       7.66 करोड़       1,227.02 करोड़ रुपये
2017-18       7.23 करोड़       1,242.64 करोड़ रुपये
2018-19      7.09 करोड        1,269.36 करोड़ रुपये

पूर्वोत्तर रेलवे
   वर्ष        यात्री की संख्या            आय
2016-17    6.88 करोड़       873.60 करोड़ रुपये
2017-18    6.20 करोड़       1,105.73 करोड़ रुपये
2018-19     6 करोड़          1,212.89 करोड़ रुपये

 
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रेल हादसे पर अंकुश लगाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर पटरियों का मेंटेनेंस कराया जा रहा है। इसलिए ट्रेेनों को निरस्त या डायवर्ट किया जा रहा है। लंबे समय में इसका लाभ होगा। आधारभूत ढांचा मजबूत होने पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। - संजय त्रिपाठी, डीआरएम, उत्तर रेलवे
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