डेमो
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बता दें, पटरियों की मरम्मत, डबलिंग, सिग्नलिंग व नॉन इंटरलॉकिंग के साथ स्टेशनों का कायाकल्प भी हो रहा है। ब्लॉक लेने ट्रेेनें रद्द व बदले रूट से चलाई जा रही हैं। तो कुछ ट्रेेनें ऐसी भी हैं, जो छह महीने से निरस्त हैँ। रेलवे इसे आधारभूत ढांचे में मजबूती के लिए जरूरी बता रहा है। पर, ट्रेनों की संचालन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से यात्री आजिज हो रहे हैं। नतीजतन, पैसेंजरों को संख्या लगातार कम हो रही है। पिछले तीन साल के आंकड़ों को देखें- वर्ष 2016-17 में उत्तर रेलवे में पैसेंजरों की संख्या 7.66 करोड़, जो 2018-19 में घटकर 7.09 करोड़ पहुंच गई। यही हाल पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के स्टेशनों पर भी है। वर्ष 2016-17 में 6.88 करोड़ पैसेंजर पहुंचे थे, जो 2018-19 में घटकर छह करोड़ हो गया। यानी 88 लाख पैसेंजर कम हो गए।