सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में अयोध्या मामले का मध्यस्थता के जरिये हल निकालने की शुरुआत की है। सर्वोच्च न्यायालय की इस पहल का राजधानी के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने स्वागत किया है। साथ ही उम्मीद जताई है कि राजनीतिक हस्तक्षेप न होने की दशा में कोई न कोई हल निकल सकता है। वहीं, कई धर्मगुरुओं ने पहले ही कुछ लोगों की ओर से अयोध्या में मस्जिद न बनाने देने के बयान पर एतराज भी जताया है।
मस्जिद के लिए दूसरी जगह बड़ी जमीन लेकर समझौता संभव
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पूर्व सदस्य मौलाना सलमान हुसैनी नदवी ने कहा कि इस्लामी शरीयत मस्जिद शिफ्ट करने की इजाजत देती है। खलीफा हजरत उमर ने कूफा शहर में एक मस्जिद को शिफ्ट करके उसकी जगह खजूर का बाजार बनवाया था। अमन की खातिर मस्जिद के लिए दूसरी जगह बड़ी जमीन लेकर समझौता किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो सुप्रीम कोर्ट को गारंटी देनी होगी कि इसके बाद किसी भी मस्जिद, दरगाह, दर्सगाह को लेकर विवाद पैदा नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बातचीत होना अच्छा
2 of 6
मौलाना खालिद रशीद
- फोटो : ANI
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता की पहल का स्वागत है। सबसे अच्छी बात है कि बातचीत सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मे होगी। हिदायत दी गई है कि बातचीत को सार्वजनिक न किया जाए। इससे उम्मीद है कि बातचीत में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं हो पाएगा। ऐसे में हल निकलने की उम्मीद जगी है।
विज्ञापन
पर्सनल लॉ बोर्ड करेगा सहयोग
3 of 6
जफरयाब जिलानी
- फोटो : अमर उजाला
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी एडवोकेट ने बताया कि बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से उनकी निगरानी में बातचीत करने पर सहयोग देने पर हामी भरी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए पैनल बना दिया है तो बोर्ड अपने वादे के मुताबिक पूरा सहयोग करेगा। सभी मुस्लिम पक्ष भी सहयोग करने को तैयार हैं।
बातचीत से हल निकालने में होंगे कामयाब
4 of 6
मौलाना सूफियान निजाम
- फोटो : amar ujala
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निजामी ने बताया कि उम्मीद जताते हैं कि सभी पक्षकार बैठकर बातचीत से हल निकालने में कामयाब होंगे। जो लोग इस पहल का विरोध कर रहे हैं, ये वही लोग हैं जो हमेशा से मामले को तूल देकर हिंदू और मुसलमानों में तनाव बनाए रखना चाहते हैं।
विज्ञापन
...तो नहीं रह जाएगा बातचीत का मतलब
5 of 6
मौलाना सैफ अब्बास
- फोटो : amar ujala
शिया मून कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने बताया कि कुछ लोग पहले से ही कह रहे हैं कि वहां मस्जिद नहीं बनने देंगे। जब बातचीत से पहले ही निर्णय सुनाया जाने लगेगा तो बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। बातचीत से राजनीतिक दखलअंदाजी को पूरी तरह दूर रखना होगा। मुस्लिम समुदाय को इग्नॉर कर कोई भी फैसला मान्य नहीं होगा।
अयोध्या राम की जन्मभूमि, इसे ध्यान में रख बातचीत आगे बढ़ाएं मुसलमान
6 of 6
सैयद वसीम रिजवी
- फोटो : amar ujala
शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने बताया कि मुस्लिम समुदाय को सोच-समझ कर फैसला करना चाहिए। अयोध्या राम की जन्मभूमि है। मुसलमानों को इस बात को जेहन में रखकर बातचीत को आगे बढ़ाना होगा। बातचीत से अगर समझौता हो जाता है तो माहौल सुधरेगा। पाकिस्तान की ओर से देश में फसाद कराने की जो कोशिश हो रही है, उससे निजात मिलेगी।