बेशक वे महिलाएं हिंदू धर्म से ताल्लुक नहीं रखतीं लेकिन मुस्लिम होने के बावजूद करवाचौथ पर अपने शौहर की सलामती के लिए रोजा रखती हैं और चांद के दीदार के साथ नमाज पढ़कर रोजा खोलती हैं। साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल हैं ये मुस्लिम परिवारों की महिलाएं। राजधानी लखनऊ में सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्यौहारों को मिल-जुलकर मनाते हैं। होली, ईद, बकरीद, दिवाली, क्रिसमस, लोहड़ी या रक्षाबंधन तो जैसे यहां की साझा संस्कृति का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन करवाचौथ जैसा परंपरागत हिंदू पर्व भी यहां के कई मुस्लिम परिवारों में लंबे समय से मनाया जाता रहा है। हां, तरीका थोड़ा अलग होता है मगर उद्देश्य एक। आज हम आपकी मुलाकात करवा रहे हैं राजधानी के कुछ ऐसे ही मुस्लिम परिवारों से जहां करवाचौथ के दिन ख्वातीन अपने शौहर की सलामती और लंबी उम्र के लिए रोजा रखती हैं और शाम को चांद के दीदार के साथ नमाज अदा कर रोजा खोलती हैं।