अवध विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आज जब इंडोनेशिया से आए मुस्लिम कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया तो वहां बैठे दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा ली। 50 मिनट के इस मंचन में कलाकारों ने भगवान राम के जन्म से लेकर रावण वध तक की कथाओं को नृत्य नाटिका विधा से मंचन किया।
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इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दीक्षित, राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास आयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के साथ अन्य संत मौजूद रहे।
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इन कलाकारों की प्रस्तुति से पूरे प्रेक्षागृह का माहौल भक्तिमय हो गया। यह जानकार दर्शक और ज्यादा अचंभित थे कि इतना संमोहक मंचन किसी अन्य देश के मुस्लिम कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। यह पहली बार है जब राम के अनुयायी विदेशी मुसलमान अयोध्या में अपनी प्रस्तुति दे रहे थे।
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अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह कहते हैं कि, इंडोनेशिया का धर्म इस्लाम है और संस्कृति रामायण है। श्रीराम की चरणपादुका की धूल के नाम से वहां के राष्ट्रपति शपथ ग्रहण कर सत्तासीन होते हैं।
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राम को इंडोनेशियाई अपना पूर्वज मानते हैं। वहां के कलाकार तीन प्रकार की रामलीलाएं अद्भुत रूप में मंचित करते हैं। भारत में ऋषि वाल्मीकि की रामायण तो इंडोनेशिया में कवि योगेश्वर की लिखी रामायण का मंचन होता है।
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वहां दशरथ को विश्वरंजन, सीता को सिंता, हनुमान को अनोमान कहा जाता है। इंडोनेशिया में तीन तरह की रामलीला होती हैं, जिसमें पपेट, शैडो पपेट और बैले रामलीला हैं। इंडोनेशिया के कलाकरों ने यहां 13 दुर्लभ वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुति दी।