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‘खिचड़ी खाता था औरंगजेब, मुस्लिम गोश्त से नीचे बात नहीं करते’

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मुनव्वर राना हाल ही में मुम्बई के ब्रीच कैण्डी अस्पताल से मुंह के कैंसर को मात देकर लौटे हैं। उन्होंने लखनऊ में 15 साल बिताए और अब इसे छोड़कर रायबरेली बसने का फैसला किया है। मुनव्वर कहते हैं, मुझे शहर से शिकायत नहीं है। पर, अब मैं रायबरेली जाकर रहूंगा। यहां हुसैनगंज में रह रहे मुनव्वर ने बुधवार को नीरज अम्बुज से की खास बातचीत में परत-दर-परत खोली अपने मन की पीड़ा...
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‘खिचड़ी खाता था औरंगजेब, मुस्लिम गोश्त से नीचे बात नहीं करते’

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सोचा कि इससे (कैंसर से) भी लड़ लिया जाय, डरा रहा था बहुत दिनों से कैंसर हमको’-ऐसे हालात में इंसान का जमीर सबसे पहले आवाज देता है। दूसरों के साथ की गईं नाइंसाफी व बेईमानी याद आने लगती हैं। गर, जमीर सही है तो डर नहीं लगता। मैं कतई नहीं डरा। मैं उसी हिन्दुस्तान को देखते हुए मरना चाहता था, जिसे देखकर पैदा हुआ हूं। जानें अगले जन्म में कहां पैदा होना चाहते हैं मुनव्वर राना...
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‘खिचड़ी खाता था औरंगजेब, मुस्लिम गोश्त से नीचे बात नहीं करते’

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ईमानदारी से कहूं तो यहां अच्छा देखने को कुछ बचा नहीं है। सूरदास ने जब कृष्ण को देखने के बाद उनसे आंखें वापस लेने को कहा तो कृष्ण बोले, ऐसा क्यों। तब सूरदास ने कहा-अब अच्छा देखने को कुछ बचा नहीं। वैसे तो इस्लाम में पुनर्जन्म की मान्यता नहीं है। पर, गर ऐसा होता है तो अल्लाह से मनाऊंगा कि पुनर्जन्म हिन्दुस्तान में ही हो। जानें मुस्लिम को लिए क्या बोले मुनव्वर...
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‘खिचड़ी खाता था औरंगजेब, मुस्लिम गोश्त से नीचे बात नहीं करते’

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हिन्दुस्तान का दुर्भाग्य है कि इतिहास के सिर्फ उन पन्नों को ही पलटा जाता है, जहां से लोगों की भावनाओं को भड़काया जा सके। शिवाजी व औरंगजेब एक-दूसरे के दुश्मन थे, ये पढ़ाया जाता है। लेकिन शिवाजी की सेना में ओहदेदार मुसलमान थे, ये नहीं जानते। औरंगजेब खिचड़ी खाता था, लेकिन आज के मुसलमान गोश्त से नीचे बात नहीं करते। दरअसल, यहां सच को गुनाह, सच बोलने वाले को नास्तिक माना जाता है।
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