दरअसल, वर्ष 1993-94 में बसपा ने पहली बार किसी राजनीतिक दल से गठबंधन किया था तो वह सपा ही थी। जगह-जगह यह नारे लगे थे, ‘मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम।’ नतीजों से भाजपा तो नहीं उड़ी, लेकिन ढांचा ढहने और मंदिर के नाम पर सत्ता की कुर्बानी का संदेश देने के बावजूद पिछड़ी और दलित जातियों की गोलबंदी से हार गई। उसे बमुश्किल 177 सीटें ही मिल पाईं और सपा व बसपा के गठबंधन ने दूसरों के समर्थन से बहुमत का आंकड़ा पाकर सरकार बना ली।