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गरीब रोते हुए मेरे घर आता है और हंसते हुए जाता है: माफिया मुख्तार का बेटा अब्बास

Fri, 03 Mar 2017 10:09 AM IST
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, मऊ
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माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे और घोसी से बसपा प्रत्याशी अब्बास अंसारी भले ही पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हों लेकिन खुद को किसी परिपक्व राजनीतिज्ञ से कम नहीं मानते।

पिता को अपना आदर्श मानने वाले अब्बास कहते हैं, ‘लोगों की खिदमत के मौके के साथ राजनीति उन्हें विरासत में मिली है। जिस तरह मछली के बच्चे को तैरना सीखना नहीं पड़ता, उसी तरह मुख्तार का यह बेटा भी खुद-ब-खुद राजनीति करना सीख गया।’

महज 25 साल की उम्र में पिता के साथ-साथ अपना चुनाव मैनेज कर रहे अब्बास आत्मविश्वास से लबरेज हैं। कहते हैं, ‘हमारा चुनाव तो जनता मैनेज करती है। हमें ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ता।’ (तस्वीर देखें- अपने पिता मुख्तार अंसारी के सा‌थ अब्बास अंसारी)
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बुधवार दोपहर एक बजे घोसी विधानसभा क्षेत्र के इंदारा में जनसभा को संबोधित करने के बाद अब्बास ने अमर उजाला की ओर से पूछे गए सवालों का तफसील से जवाब दिया। कहा, ‘इस वक्त मछली की आंख की तरह सिर्फ अपनी विधानसभा क्षेत्र का चुनाव दिख रहा है। मेरे पिता को विपक्षी नेताओं व मीडिया ने मिलकर माफिया डॉन के तौर पर पेश किया है, जबकि उन्होंने सदैव पूर्वांचल से सामंतवाद को उखाड़ फेंकने के लिए संघर्ष किया।
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कभी मेरे घर बिना बताए आकर देख लेना -गरीब रोते हुए घर के अंदर दाखिल होता है और हंसते हुए बाहर निकलता है। पापा (मुख्तार) जब घर पर होते हैं तो क्षेत्र के भूखे-नंगे लोग भी उनकी बराबरी में बैठकर चाय पीते हैं। हम ऐसे ही बराबरी वाले समाज का सपना देखते हैं, जबकि सामंतवादी ताकतों को यह गवारा नहीं। मेरी भी मुख्य लड़ाई सामंतवाद से है। मऊ व आसपास के जिलों मेंअफसरों और पुलिस वालों से मिलकर कुछ दबंग लगातार जनता पर अत्याचार कर रहे हैं। इसे रोकना हम अपना फर्ज समझते हैं।’

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अब्बास कहते हैं, ‘105 देशों की यात्रा कर चुका हूं। स्पोर्ट्समैन हूं। नौजवान को अगर काम मिल जाए तो वह कभी गलत रास्ते पर नहीं जा सकता। उनके लिए कुछ नया कर गुजरने की सोच के साथ चुनाव मैदान में उतरा हूं। स्कूलों व मदरसों को कंप्यूटर से जोड़ने का काम करूंगा। क्षेत्र में एक स्टेडियम बनाने का इरादा है, ताकि यहां के युवा खेल के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा सकें। ट्रॉमा सेंटर का निर्माण भी मेरी प्राथमिकताओं में है। बंद मिलों को चालू करवाने के लिए भी प्रयास करूंगा और पहले वर्ष में ही क्षेत्र के हर गांव में बिजली पहुंचा दूंगा।’
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अब्बास कहते हैं कि, ‘एक विधायक अकेले अपने दम पर यह काम नहीं कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में बहन मायावती की अगुवाई में बसपा की सरकार बने। चूंकि, अखिलेश यादव ने जिस तरह से अपने पिता मुलायम सिंह यादव का अपमान किया, उससे मुसलमान ही नहीं, यादव भी नाराज हैं।
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आज स्थिति यह है कि हर बाप को लग रहा है कि कल कहीं उसका बेटा अखिलेश की तरह तो नहीं निकल जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के झूठ से भी हर जाति व धर्म के लोग आजिज आ चुके हैं। उनके दिखावटी वादों और जियो के सिम से नौजवानों का भाग्य नहीं बदलेगा। इसके लिए उन्हें आगे बढ़ने के मौके उपलब्ध कराने होंगे।’

अपने चुनाव परिणाम को लेकर वह कहते हैं कि, ‘मैं कभी कोई दावा नहीं करता। बस, 11 मार्च को परिणाम देख लेना।’ उनके इतना कहते ही समर्थक जोर-जोर से-अब्बास-जिंदाबाद, मुख्तार अंसारी-जिंदाबाद के नारों से पूरा वातावरण सराबोर कर देते हैं।
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