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बेटे की मौत के बाद पहली बार देखा घटनास्थल, टिफिन में सूखे पराठे देख नम हो गईं मां की आंखें

Fri, 04 Oct 2019 04:50 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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पुलिस की पड़ताल के दौरान बेटे राहुल के टिफिन को निहारतीं अनन्मा - फोटो : amar ujala
‘...क्या यही है कांस्टेंशिया बिल्डिंग। यहीं गिरा था मेरा बेटा! ओहह... इतनी ऊंचाई से...’ यह कहते हुए राहुल की मां अनम्मा की आंखें डबडबा गईं तो पिता वी. श्रीधरन जैसे पत्थर के हो गए हों। दोनों के गले भरे हुए थे। एक-दूसरे का हाथ पकड़कर काफी देर तक जड़वत खड़े रहे। लाडले की मौत के साढ़े चार साल बाद बृहस्पतिवार को पहली बार दोनों को स्कूल में प्रवेश मिला था। अभी तक उन्होंने देखा ही नहीं था कि बेटे ने कहां, कैसे और किस जगह पर गिरकर दम तोड़ा था।


 
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पुलिस की पड़ताल के दौरान बेटे राहुल के टिफिन को निहारतीं अनन्मा - फोटो : amar ujala
मालूम हो एसजीपीजीआई परिसर निवासी व वहां नेफ्रोलॉजी विभाग में टेक्निकल अफसर वी. श्रीधरन के बेटे राहुल की 10 अप्रैल 2015 की सुबह स्कूल के सौ फीट ऊंचे कांस्टेंशिया स्मारक के छज्जे से संदिग्ध हालात में गिरकर मौत हो गई थी। राहुल की मां अनम्मा ने गौतमपल्ली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ बेटे की हत्या का केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस पर पक्षपात व सतही विवेचना करने तथा कॉलेज प्रशासन को बचाने का आरोप लगाते हुए मृतक के भाई एस. रोहित ने विवेचना की निगरानी के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी अनम्मा के लिए तो एक-एक पल रुला देने वाला था। उन्हें 10 अप्रैल 2015 की वो सुबह बार-बार याद आ रही थी जब राहुल हंसता-मुस्कुराता स्कूल के लिए निकला था। वो स्कूल के सत्र का पहला दिन था इसलिए राहुल कुछ ज्यादा ही उत्साहित था।
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बेटे राहुल के टिफिन को निहारतीं अनन्मा - फोटो : amar ujala
उन्होंने बड़े प्यार से राहुल को टिफिन में पराठे और सब्जी बनाकर दिया। राहुल के बैग से जब टिफिन निकला तो वह भावुक हो गईं। टिफिन खोलकर देखा तो भीतर सूखे हुए पराठे रखे थे। अनम्मा की आंखें नम हो गईं।

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मां अनन्मा - फोटो : amar ujala
 राहुल के बैग में रखी होम्योपैथी दवा की प्लास्टिक की डिबिया देखकर उन्होंने उठा लीं। बोलीं, ‘मेरा मंगलसूत्र टूट गया था। उसके मोती राहुल ने संभाल कर रख लिए थे।’
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मां अनन्मा - फोटो : amar ujala
यह कहते हुए उन्होंने डिबिया खोलकर हथेली पर पलटी तो काले रंग के मोती बिखर गए। भर्राए गले से अनम्मा ने बताया कि, ‘राहुल को अपनों से जुड़ी हर चीज सहेजकर रखने का शौक था।’
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