‘...क्या यही है कांस्टेंशिया बिल्डिंग। यहीं गिरा था मेरा बेटा! ओहह... इतनी ऊंचाई से...’ यह कहते हुए राहुल की मां अनम्मा की आंखें डबडबा गईं तो पिता वी. श्रीधरन जैसे पत्थर के हो गए हों। दोनों के गले भरे हुए थे। एक-दूसरे का हाथ पकड़कर काफी देर तक जड़वत खड़े रहे। लाडले की मौत के साढ़े चार साल बाद बृहस्पतिवार को पहली बार दोनों को स्कूल में प्रवेश मिला था। अभी तक उन्होंने देखा ही नहीं था कि बेटे ने कहां, कैसे और किस जगह पर गिरकर दम तोड़ा था।