मिस दिवा यूनिवर्स वर्तिका
- फोटो : amar ujala
मेरा लखनऊ बदल गया, पर नहीं बदली घरवाली फीलिंग
जब मैं 2015 में यहां से गई थी तो यहां बहुत सी चीजें नहीं थी। कई सारे क्लब हो गए हैं। मेट्रो आ गई है। साथ ही लोगों का माइंड सेट बदल गया है। यह हर ब्रांड है और लोगों की लाइफ स्टाइल का हिस्सा हैं। अब लोग फैशन की परिभाषा समझते हैं और उससे जुड़े लोगों को स्वीकार करने लगें हैं, लेकिन एक चीज नहीं बदली यहां के अपनेपन का अहसास। आज भी जब आती हूं तो घरवाली फीलिंग आती है। दुनिया में कहीं भी रहूं लेकिन अपना शहर, अपना घर घर ही रहेगा।