बात अप्रैल 1940 की है। आजादी की लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंच चुकी थी। नेता जी सुभाष चंद्र बोस उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे। वह सभी को 5 अप्रैल 1940 को लखनऊ में क्रांतिकारियों के आयोजित प्रशिक्षण शिविर का न्यौता देते हुए घूम रहे थे।
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आज जहां बेगम हजरत महल पार्क स्थित है, वहां पर ही प्रशिक्षण शिविर हुआ। स्वातंत्रय वीर सुभाष पुस्तक से पता चलता है कि बेगम हजरत महल पार्क का दृश्य अद्भुत था। महिलाएंं अपने विदेशी कपड़ों को उतार कर जला रही थीं। कुछ लोग अपने पुत्र व पुुत्रियों को अंग्रेजी न पढ़ाने का संकल्प ले रहे थे। समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र बताते हैं, ‘इसी बीच एक युवती उठी और उसने सुभाष बाबू के सामने ही घोषणा कर दी कि जब तक देश आजाद नहीं हो जाएगा। तब तक शादी नहीं करूंगी।
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राजाराम गुप्त (बाबा भारद्वाज)
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वह युवती उस समय गोला (लखीमपुरखरी) के स्टेशन मास्टर की पुत्री किरन थी। इसी बीच एक युवक राजाराम गुप्त भी उठा और उसने भी आजादी मिलने पर ही शादी करने की घोषणा कर दी। उसके पिता भी स्टेशन मास्टर थे।
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राजाराम गुप्त ही आज बाबा भारद्वाज नाम से जाने जाते हैं। दोनों लोगों ने नेता जी से विवाह में आकर आशीर्वाद देने का वादा ले लिया। नेता जी ने हामी भी कर दी। कहा, ‘सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।’
देश आजाद हुआ। पर, संयोग नेताजी गुमनामी जीवन में चले गए। इधर भी संयोग से बाबा और किरन की आजादी बाद शादी का संकल्प तो पूरा हुआ। पर, अलग-अलग जीवन साथी के साथ।