संयुक्त परिवार
- फोटो : अमर उजाला
त्यौहार से बीमारी तक हर मोर्चे पर डटा रहता है परिवार
- खरे परिवार, अहिरीटोला सरायमाली खां
मदन मोहन लाल खरे से जब उनके परिवार के सदस्यों के नाम पूछे जाते हैं तो अंगुलियों पर गिनती करते हुए एकटक पीढ़ी दर पीढ़ी नाम गिनाने शुरू करते हैं। बच्चों के नाम दोहराते भी हैं। वह बताते हैं कि इतना बड़ा परिवार संभालना आसान बात नहीं है। पर, बुजुर्ग, युवा व बच्चों के बीच रहने का जो लुत्फ है, वह न्यूक्लियर फैमिली में कहीं नहीं मिलता। दिन का खाना सुबह बनना शुरू होता है और रात का खाना शाम से ही चढ़ना शुरू हो जाता है। थोक केभाव सामान मंगाया जाता है और जब घर पर फंक्शन होता है तो बाहर से किसी की मदद की जरूरत नहीं पड़ती।
पहली पीढ़ी : मदन मोहन लाल खरे, माधुरी खरे। मोहन कृष्ण खरे, रमेश चन्द्र खरे, कनक लता खरे, पुष्पा खरे, अशोक कुमार खरे, निशी खरे, माया खरे, प्रदीप कुमार खरे, वंदना खरे, राजेश कुमार खरे, शालिनी खरे, मनोज कुमार खरे, सीमा खरे , पंकज खरे, अंजू खरे, शशि खरे, सरला खरे, पीएसएल श्रीवास्तव, मंजू श्रीवास्तव, विक्रम खरे, विनीता खरे।
दूसरी पीढ़ी : प्रशांत खरे, दिव्या खरे, नीरज खरे, प्राची खरे, पुनीत खरे, प्रियंका खरे, नितिन श्रीवास्तव, संचिता श्रीवास्तव, लकी खरे, रचना खरे, मोहित खरे, संचिता खरे, शुभम खरे, प्रज्ञा खरे, आशीष खरे, रिजुता खरे, नितिन खरे, पारुल खरे, रितेश खरे, प्रज्ञा खरे, निधा, नीरज, शिवानी, राहुल, भावना, जितेश, मौसमी, चित्रेश, गरिमा, सुमित, साक्षी, निहिरा, तान्या, कृष्णा, नैंसी, मानस, अनुमेश, रूपाली।
तीसरी पीढ़ी : परी खरे, यती खरे, पार्थ खरे, हिमनिश, विग्नेश, नील, अंतरा, शिखर, अंश, सोना, यश, वंशिका, वंशज, सृष्टि, समृद्घि, स्पर्श, शौर्य व सक्षम।