सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश को लागू कराने में शासन और मेडिकल स्टूडेंट्स आमने-सामने आए गए। तीन दिन से केजीएमयू परिसर में काउंसलिंग करवाने में असफल रहे चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सोमवार को नेशनल कॉलेज को अपना नया ठिकाना बनाया लेकिन वहां भी छात्र-छात्राएं पहुंच गए।
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भारी पुलिस बल के बावजूद उन्होंने जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। काउंसलिंग स्थल में घुसने के प्रयास में उनकी पुलिसकर्मियों से नोंकझोंक और हाथापाई भी हुई। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सकों से भी उनकी झड़प हुई।
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इस सब से आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने अपना आखिरी हथियार चलाते हुए पहले केजीएमयू की ओपीडी को ठप करा दिया। जब इससे भी बात नहीं बनी तो ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी सेवाएं भी बाधितकर दी गई।
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इसके चलते शाम तक छह मरीजों की मौत हो गई। जबकि 100 से अधिक मरीजों को बिना इलाज के लिए वापस लौटा दिया गया।
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यूपीपीजीएमईई-2016 में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सको को 30 फीसदी अंकों की वरीयता देने से अपनी महत्वपूर्ण सीटें गंवाने वाले छात्र-छात्राएं बेबस हो गए।
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उन्होंने काउंसलिंग रुकवाने का भरसक प्रयास किया लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। पुलिस और प्रशासन के साथ उनकी कई बार भिड़ंत की नौबत आयी। धक्का-मुक्की हुई लेकिन कांउसलिंग बदस्तूर जारी रही।
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अपने हाथ से भविष्य निकलता देख कई छात्राएं फूटफूट कर रो पड़ीं। पुलिस की कार्रवाई की सूचना के बाद सुबह लगभग 10.30 बजे ओपीडी सेवाएं ठपकरा दी गई।
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छात्र-छात्राओं ने सबसे पहले पर्चा बनाने का काम रोका। इसके बाद ओपीडी कक्षों में जाकर फैकल्टी मेम्बर्स से मरीजों को न देखने की अपील की। इस फैकल्टी मेम्बर्स ने कहा कि यदि मरीज आएगा तो वो उसे देखेंगे जरूर।
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इसके बाद छात्र-छात्राएं न्यू ओपीडी के गेट पर पहुंच गए। उन्होंने मुख्य गेट को बंदकर उसमें चेन से ताला डाल दिया। इससे उनकी मरीजों के परिवारीजनों से कहासुनी हो गई।
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इसी बीच वहां पुलिस पंहुच गई और दोनों को पक्षों को अलग-अलग किया। इसके बाद चिकित्सा छात्रों ने ओपीडी पूरी तरह से ठपकर दी और उसके सभी गेट बंदकर दिए।
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इसके बाद छात्र-छात्राओं का एक गुट ट्रॉमा सेंटर पहुंच गया। वहां भी गेट बंदकर उन्होंने मरीजों की भर्ती बंद कर दी। वहां भी शासन और डॉक्टरों के झगड़े का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा।
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हालांकि केजीएमयू ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में इलाज ठप करवाने के बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने काउंसलिंग जारी रखी।
आपाधापी और हंगामे के बीच शाम तक 80 सीटों को भरा जा चुका था। इस बीच रेजीडेंट डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज करने से मनाकर दिया था। (इलाज न मिलने से निराश एक मरीज।)