बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा, भाजपा में छंटे-छंटाए गुंडे, माफिया और बदमाश भरे पड़े हैं। भाजपा अध्यक्ष का इतिहास भी सबको पता है। मायावती सोमवार को यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब दे रही थीं।
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बसपा अध्यक्ष से सवाल हुआ कि अमित शाह ने अपनी परिवर्तन यात्रा के दौरान कहा है कि विरोधी दलों में गुंडे भरे पड़े हैं, भाजपा में कोई गुंडा नहीं है। मायावती ने कहा कि भाजपा में नामी-गिरामी गुंडे भरे पड़े हैं। भाजपा में गुंडों की शुरुआत गुजरात से ही होती है। इनके नाम पूरा देश जानता है।
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बसपा राज में किसानों के लिए कुछ न किए जाने के आरोप पर मायावती ने कहा कि भाजपा नेताओं को किसानों से जाकर पूछना चाहिए, वही सही जवाब दे देंगे। मोदी सरकार ने ही किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण बिल लाने का प्रयास किया था। किसानों ने विरोध किया तो पैर वापस खींचने पड़े। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कराने के दावे को झूठा करार दिया।
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बसपा को किसी के सहारे की जरूरत नहीं
मायावती ने फिर दुहराया कि सपा यदि गठबंधन करती है तो साफ हो जाएगा कि उसने चुनाव से पहले ही हार मान ली है। उन्होंने बसपा से किसी भी दल से गठबंधन से इन्कार करते हुए कहा कि बसपा अकेले अपने बलबूते स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाएगी।
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गरीबों को मारुति कार नहीं, कालेधन का पैसा चाहिए
मायावती ने अमित शाह के उस बयान पर तंज कसा जिसमें उन्होंने कहा था कि बुंदेलखंड में यदि अवैध खनन बंद हो जाए तो हर घर में मारुति कार आ जाएगी। बुंदेलखंड व पूर्वांचल के गरीब लोगों को मारुति कार नहीं, स्थानीय स्तर पर रोजगार, पानी-बिजली व स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए।
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माया ने भी प्रदेश के विभाजन की मांग दुहराई
माया ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की वकालत का जिक्र किए बगैर प्रदेश के बंटवारे की वकालत की। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड, पूर्वांचल, पश्चिम यूपी व अवध प्रदेश का अपना नया राज्य चाहिए। इस संबंध में बसपा सरकार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर प्रदेश विभाजन का प्रस्ताव केंद्र को भेज चुकी है। केंद्र को उस पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
कानून-व्यवस्था व पर्यावरण पर भी गौर फरमाएं सीएम
मायावती ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सलाह दी कि वह अपने पारिवारिक वर्चस्व व अस्तित्व की लड़ाई से समय निकालकर बिगड़ती कानून-व्यवस्था दुरुस्त करें। इसके साथ ही दिल्ली के सीमावर्ती जिलों में पर्यावरण प्रदूषण की विकट स्थिति पर भी ध्यान दें।