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2019 के लिए ये है मायावती का प्लान, गठबंधन से इन्कार नहीं पर अकेले लड़ने की है तैयारी

Sun, 03 Dec 2017 07:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala
यूपी नगर निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन ने बसपा की रणनीति में बदलाव का संकेत किया है। पार्टी लोकसभा चुनाव-2019 में भाजपा के खिलाफ किसी संभावित गठबंधन में शामिल होने से सीधे इन्कार भले न करे, लेकिन उसकी तैयारी सभी सीटों पर लड़ने के लिहाज से होगी।

निकाय चुनाव के नतीजों के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगे किसी भी दल से गठबंधन कर चुनाव लड़ने के सवाल को अपने अंदाज में टाल दिया। उन्होंने कहा कि वह देश भर में अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम और अपरकास्ट सहित सर्वसमाज को भाईचारे के आधार पर जोड़ना चाहती हैं। इससे बड़ा गठबंधन और क्या हो सकता है?

बसपा की सियासी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे राजनीतिशास्त्री प्रो. गोपाल प्रसाद कहते हैं कि बसपा अध्यक्ष का संकेत साफ है कि वह गठबंधन को ना तो नहीं कहेंगी और न ही इसके भरोसे बैठी रहेंगी। वह लोकसभा की हर सीट पर प्रत्याशी उतारने के लिहाज से तैयारी करेंगी। यदि गठबंधन की नौबत आएगी तो निकाय चुनाव के उत्साहजनक नतीजे सीटों के मोलतोल में उनके काम आएंगे।
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दलित चिंतक प्रो. कालीचरण सनेही कहते हैं कि बसपा को जब-जब हल्के में लिया जाता है, वह जोरदार वापसी करती है। निकाय चुनाव के नतीजों से साफ है कि  बसपा का आकलन अब सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र की पार्टी के आधार पर नहीं होगा। बसपा का न केवल दलित बेस वोट बैंक कायम है बल्कि मुस्लिम मतदाताओं ने फिर लौटने का संकेत किया है। झांसी में अपर कास्ट का प्रत्याशी दिया गया तो उसे अच्छा समर्थन मिला। पार्टी वहां दूसरे नंबर पर रही। लोकसभा चुनाव की तैयारी में ये प्रदर्शन बसपा को रणनीति बनाने में मदद करेंगे।
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यहां यह भी गौरतलब है कि बसपा का शहरी क्षेत्रों में यह प्रदर्शन तब है जब नगरीय क्षेत्रों में संगठन का गठन सिम्बल पर चुनाव लड़ने की रणनीति तय करने के बाद निकाय चुनाव से कुछ महीने पहले किया गया। बसपा के एक जिम्मेदार नेता कहते हैं कि पार्टी के खराब दिन देखकर तमाम लोग इस बीच चले गए, लेकिन इस चुनाव ने उनकी भरपाई कर दी है। हर शहर में नए चेहरे सामने आए हैं। लोकसभा चुनाव में यह बहुत काम आएगा।

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गठबंधन होने पर सम्मानजनक शर्त मनवाने की ताकत बढ़ी
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले 16 नवंबर को प्रदेश मुख्यालय पर पार्टी के जिम्मदेार नेताओं की बैठक की थी। तब उन्होंने कहा था कि वह भाजपा व अन्य सांप्रदायिक दलों को सत्ता में आने से रोकने के लिए विधानसभा व लोकसभा का आम चुनाव सेक्युलर पार्टियों के साथ गठबंधन करके लड़ने की पक्षधर हैं। लेकिन बसपा गठबंधन तभी करेगी जब बंटवारे में सीटें सम्मानजनक मिलेंगी। वरना, अकेले चुनाव लड़ना ही ज्यादा बेहतर समझती हैं। उन्होंने गुजरात और हिमाचल में गठबंधन न होने का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा था। निकाय चुनाव के नतीजे गठबंधन की दशा में मायावती को सम्मानजनक सीटों पर अपना स्टैंड लेने में भरपूर मदद करेंगे।
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बसपा की शहरी ताकत
महापौर : 2, पार्षद :147
नगर पालिका अध्यक्ष : 29, नगर पालिका परिषद सदस्य : 262
नगर पंचायत अध्यक्ष : 45, नगर पंचायत सदस्य : 218
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