आज बीएसपी बॉस मायावती का जन्मदिन है। इस मौके पर हम बता रहे हैं उनकी कुछ खूबियां जो उनकी पहचान हैं साथ में हैं कुछ कमियां भी...
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कभी अनुशासनप्रिय तो कभी जिद्दी, कुछ ऐसी हैं मायावती
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बसपा सुप्रीमो मायावती अनुशासन और कानून पसंद नेता के रूप में जानी जाती है। उनकी छवि ऐसे नेता की बन चुकी है जो अपनी भी पार्टी के सांसद और विधायक तक को गिरफ्तार करा सकती हैं। वह भले ही अपनी पार्टी में दबंग और आपराधिक छवि वालों को ले लें लेकिन इन पर काबू रखने वाली नेता के रूप में भी उनकी पहचान है।
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कभी अनुशासनप्रिय तो कभी जिद्दी, कुछ ऐसी हैं मायावती
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हाल ही में अतरौली सीट से बसपा प्रत्याशी संगीता चौधरी पर मायावती का गुस्सा उतरा। उन्होंने संगीता के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए टिकट काट दिया गया। बता दें कि संगीता का टिकट कटने की वज उनके स्तर से सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया एक फोटो है। इस फोटो में वह पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पांव के पास बैठी हुई हैं और दोनों हाथों से पांव पकड़ रखे हैं।
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दूसरे दलों की तमाम कोशिशों के बावजूद वह दलित मतदाताओं में सबसे ज्यादा मजबूत पकड़ रखने वाली नेता के रूप में जानी जाती है। खासतौर से जाटव समाज के बीच उनकी सबसे जबरदस्त पकड़ मानी जाती है। यही वजह है कि लोग उनकी पार्टी का टिकट पाने को भी लालायित रहते हैं।
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कड़क मिजाज नेता के रूप में पहचानी जाने वाली मायावती अफसरों पर भी अंकुश रखने में माहिर मानी जाती है। उनके नजदीक से नजदीक अफसरों का हाल यह रहता है कि मायावती जब मुख्यमंत्री होती हैं तो उनके सामने दायरे में रहकर ही बात करते हैं।
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तुरत-फुरत निर्णय लेने वाली नेता के रूप में मायावती की पहचान बन चुकी है। कहा जाता है कि जो बात उनके दिमाग में बस गई उस पर वह अमल कराकर ही मानती है। यही वजह रही है कि उनकी सरकार में जैसे ही उनके किसी नजदीकी पर आरोप लगा तो एक दो अपवाद छोड़कर उन्होंने उसे मंत्री पद से हटाने या पार्टी से निकालने में देरी नहीं लगाई।
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माना जाता है कि मायावती अपने एजेंडे पर कोई समझौता नहीं करती हैं। भले ही कुछ भी हो जाए। उदाहरण के लिए उन्होंने अगर अंबेडकर कांशीराम इको गार्डन बनाने की सोच ली तो उसे बनाकर मानी। बुद्ध बिहार बनाने के एजेंडे पर अमल के लिए भी उन्होंने किसी की कोई परवाह नहीं की।
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मायावती की कुछ खूबियां ही उनके विरुद्ध जाती हैं। इसीलिए उनकी छवि कभी-कभी जिद्दी और तानाशाही प्रवृत्ति की बन जाती है। इसका उन्हें नुकसान भी होता है लेकिन आज तक वह अपना स्वभाव बदल नहीं पाई।
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उनका नजदीकी से नजदीकी नेता भी दावे से यह नहीं कह सकता कि मायावती उसकी बात मान ही लेंगी। यही हाल उनकी सरकार का रहता है। उनकी सरकार में मुख्यमंत्री तो दूर उनके मंत्रियों से भी मिलना मुश्किल रहता है। वह खुद भी जनता से संवाद करती नहीं दिखती। इसीलिए उन पर जनता से दूरी रखने का आरोप भी लगता है।
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यह आरोप लगता है कि मायावती के शासन में अफसर कुछ ज्यादा ही लापरवाह हो जाते हैं। वह किसी की भी नहीं सुनते। इसके चलते लोगों की समस्याओं के समाधान में भी काफी कठिनाई रहती है।
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मायावती जब-जब सरकार में रहीं तब-तब उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। पिछली सरकार में तो इतने घोटाले हो गए कि उनकी सरकार की छवि भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाली बन गई। सामंतवादी जीवन शैली के लिए भी उनकी आलोचना होती है।
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उनकी सरकार में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के दुरुपयोग की शिकायतों का सिलसिला शुरू हो जाता है। पुलिस द्वारा भी इस अधिनियम के दुरुपयोग से लोगों को काफी समस्या होती है।