हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या को राज्य की खुफिया एजेंसियों की बड़ी चूक माना जा रहा है। कमलेश की छवि कट्टर हिंदू नेता की थी। पैगंबर साहब के लिए आपत्तिजनक शब्द कहने पर उनके खिलाफ जारी फतवा गुजरात में दबोचे गए आईएसआईएस आतंकियों से पूछताछ में उनकी हत्या की साजिश का खुलासा होने के बाद भी उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई।
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कमलेश तिवारी हत्याकांड।
- फोटो : amar ujala
अमूमन किसी नेता, धार्मिक संगठन के पदाधिकारी, धर्मगुरु को आतंकी धमकी के बाद सुरक्षा की दृष्टि से उसे हाई अलर्ट पर रखा जाता है। ऐसे व्यक्तियों की पूरी जानकारी खुफिया एजेंसियों को दी जाती है। ऐसे लोगों के कार्यक्रमों, उनसे मिलने वाले व्यक्तियों और समाज व सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ टिप्पणी करने वालों पर बारीकी से नजर रखी जाती है लेकिन कमलेश को लेकर ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया।
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कमलेश तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
हत्या से पांच दिन पहले कमलेश ने जो ट्वीट किया था, उस पर भी सुरक्षा एजेंसियों में हरकत नहीं हुई। अगर सुरक्षा एजेंसियां कमलेश तिवारी को आईएसआईएस की तरफ से मिली धमकी को जरा भी गंभीरता से लेतीं तो एक दिन पहले सूरत से लखनऊ आकर होटल में रुकने वाले हत्यारों को आसानी से गिरफ्तार करके वारदात को रोका जा सकता था।
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कमलेश तिवारी (फाइल फोटो)
- फोटो : फाइल फोटो
आपको बता दें कि हिंदू महासभा के पूर्व नेता और हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी (50) की शुक्रवार को दो बदमाशों ने लखनऊ में बेरहमी से हत्या कर दी। दोनों बदमाश भगवा कपड़े पहने हुए थे और मिठाई के डिब्बे में पिस्टल व चाकू छिपाकर लाए थे।
दोनों नाका स्थित खुर्शेदबाग की तंग गलियों में स्थित कमलेश के घर पहुंचे। पहली मंजिल स्थित पार्टी दफ्तर में पहले उनकी गर्दन पर गोली मारी। फिर चाकू से ताबड़तोड़ वार करने के बाद गला रेत दिया। फिलहाल आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।