कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में बाघ और तेंदुओं की एक झलक देखने की इच्छा सबके मन में होती है। लेकिन बहुत कम पर्यटकों को ही इक्का-दुक्का बाघ और तेंदुए दिखते हैं। पहली बार बुधवार सुबह लखनऊ से आए पर्यटकों को एक, दो नहीं बल्कि बाघों का पूरा कुनबा सामने से देखने का सौभाग्य मिला। इससे पर्यटक रोमांचित रहे।
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जंगल में इस फैमिली ने देखा दुर्लभ नजारा, तस्वीरें...
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बुधवार सुबह छह बजे के आसपास भ्रमण पर निकले लखनऊ से आए पर्यटक आरके सिंह, उनकी बेटी रिद्धिमा सिंह, जामवंत सिंह, सुशीला सिंह और राघवेंद्र सिंह को कतर्नियाघाट तटबंध पर बाघों का पूरा कुनबा दिख गया। दूरी महज 80 मीटर की थी।
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रिद्धिमा बताती हैं कि पहले एक क्षण को सभी सहम गए लेकिन गाइड के मुताबिक चुपचाप हम लोग जिप्सी में बैठे रहे। कैमरा ऑन कर फोटोग्राफी शुरू कर दी। इस दौरान तीन शावक मादा बाघ के साथ कतर्नियाघाट तटबंध पर महादेवा तालाब झील के निकट चहलकदमी करते हुए झाड़ियों में चले गए। मुश्किल से पांच मिनट का समय गुजरा था तभी एक नर बाघ भी आ पहुंचा।
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वह भी कुनबे के पीछे-पीछे निकल गया। आरके सिंह और रिदिमा का कहना है कि यह ऐसा क्षण रहा, जिसे हम जीवन में भूल नहीं सकते। जंगल भ्रमण के बाद कतर्नियाघाट टाइगर कैंप पहुंचे आरके सिंह और उनकी बेटी रिदिमा ने डीएफओ आशीष तिवारी से भ्रमण की स्थिति बयां की।
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बाघों के कुनबे के बारे में बताया। इस पर डीएफओ भी काफी गदगद दिखे। डीएफओ तिवारी ने कहा कि यह काफी सुखद संकेत है। अब तक लोगों की शिकायत रहती थी कि बाघ नहीं दिखते लेकिन अब आसानी से बाघ पर्यटकों को दिखाई पड़ रहे हैं।