समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लखनऊ में लेस्बियन, गे, बाई सेक्सुअल व ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय ने केक काटकर जश्न मनाया।
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एलजीबीटी
जीपीओ पार्क पर जुटे तमाम सदस्यों ने ढोल-मंजीरों पर गीत गाकर खुशियां मनाई और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। वहीं, इस फैसले को असली आजादी बताया।
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एलजीबीटी समुदाय का कहना है कि इस फैसले से जहां समलैंगिक संबंधों के नाम पर होने वाला शोषण बंद होगा, वहीं सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ेगी और समलैंगिक शादियां, बच्चा गोद लेने जैसे अधिकार भी मिल सकेंगे।
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एलजीबीटी समुदाय का कहना है कि इस फैसले से जहां समलैंगिक संबंधों के नाम पर होने वाला शोषण बंद होगा, वहीं सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ेगी और समलैंगिक शादियां, बच्चा गोद लेने जैसे अधिकार भी मिल सकेंगे।
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एलजीबीटी समुदाय का कहना है कि इस फैसले से जहां समलैंगिक संबंधों के नाम पर होने वाला शोषण बंद होगा, वहीं सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ेगी और समलैंगिक शादियां, बच्चा गोद लेने जैसे अधिकार भी मिल सकेंगे।
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एलजीबीटी सदस्य रजा ने कहा कि समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखने से कई दूसरे अधिकार से वंचित हो रहे थे। इनमें समलैंगिक शादी, बच्चा गोद लेने जैसे अधिकार शामिल हैं। समलैंगिक संबंध रखने वाले लोग भी बच्चा चाहते हैं।
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एलजीबीटी
वहीं एकांश ने अपनी बात रखते हुए कहा कि देश को भले ही आजादी 1947 में मिल गई हो, लेकिन हमारे समुदाय के लोगों को आज सुप्रीम कोर्ट ने आजादी दी है। अब हमें भी संपत्ति में हिस्सेदारी मिल सकेगी। साथ ही समलैंगिक लोगों पर हिंसा जैसे कृत्य अब बंद हो पाएंगे।