मुठ्ठी में कुछ सपने लेकर, भरकर जेबों में आशाएं, दिल में है अरमान यही, कुछ कर जाएं, कुछ कर जाएं....। इन पंक्तियों में छिपे आत्मविश्वास का ही नतीजा है कि महिलाओं ने सबरीमाला आंदोलन, तीन तलाक जैसे मुद्दों पर जीत से लेकर चंद्रयान-2 तक का सफल ऐतिहासिक सफर पूरा किया। इसके बावजूद समानता की खातिर उन्हें अभी लंबा सफर तय करना होगा। विश्व आर्थिक मंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2234 तक ही हम कार्यस्थलों पर महिलाओं और पुरुषों में पूरी समानता को हासिल कर पाएंगे। फरवरी 2019 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर महिलाओं ने उल्लेखनीय प्रगति की है, इसके बावजूद कार्यस्थल पर महिलाओं-पुरुषों के बीच असमानता की खाई गहरी हो रही है। सोमवार को पूरा विश्व वर्ल्ड विमेन इक्वेलिटी डे मनाएगा, ऐसे में अमर उजाला ने समानता और असमानता के बीच के गहरे अंतर पर बात की शहर की उन महिलाओं से जिन्होंने अपना एक मुकाम बनाया है, लेकिन वे भी महसूस करती हैं कि समानता के अधिकार के लिए तय करना होगा लंबा सफर।