आम आदमी पार्टी के नेता डॉ. कुमार विश्वास ने गौरीगंज थाने का घेराव करने और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में हाईकोर्ट के निर्देश पर शनिवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर कर कुमार विश्वास को रिहा करने का आदेश दिया। बीते लोकसभा चुनाव के दौरान उन पर गौरीगंज में दो मुकदमे दर्ज किए गए थे।
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आम आदमी पार्टी ने बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को चुनौती देने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता व कवि डॉ. कुमार विश्वास को मैदान में उतारा था। 18 अप्रैल 2014 को आप प्रत्याशी कुमार विश्वास गौरीगंज थाने में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका वाड्रा, राहुल गांधी के प्रतिनिधि चंद्रकांत दुबे और कांग्रेस नेता विनोद मिश्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए गए थे। (दीवानी न्यायालय में मौजूद कुमार विश्वास।)
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आप प्रत्याशी का आरोप था कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इन्कार कर दिया, तब वे गौरीगंज थाने में समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए थे। पुलिस का आरोप है कि आप नेता ने थाने का घेराव कर थाना परिसर में उत्तेजक भाषण देकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था।
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गौरीगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष रतन सिंह ने आप नेता कुमार विश्वास और उनके 250 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उन पर तीन मई 2014 को गौरीगंज थाने में एसओ रतन सिंह की तहरीर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन व बिना अनुमति के अवैध प्रचार सामग्री रखने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए बीते दिनों डॉ. कुमार विश्वास को न्यायालय में तलब किया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर शनिवार को आप नेता ने अदालत में सरेंडर कर दिया।
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उनके अधिवक्ता एमपी त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने अमेठी के मौजूदा सांसद राहुल गांधी के इशारे पर डॉ. कुमार विश्वास के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज किया था। उन्होंने दलील दी कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। (कोर्ट से बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत करते कुमार विश्वास।)
अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी ने थाने का घेराव व आचार संहिता तोड़कर गंभीर अपराध किया है। कोर्ट ने बाद में आप नेता की जमानत अर्जी मंजूर कर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।