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लखनऊ की इन महिलाओं ने योग के लिए खुद को दी चुनौती, आसान हो गए आसन, फिर ये बन गया जुनून

Wed, 09 Dec 2020 04:29 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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ललिता प्रदीप, शालू बिजलानी, प्राची जैन - फोटो : अमर उजाला
योग तो ये कई वर्षों से कर ही हैं, लेकिन कभी किया, कभी नहीं। वर्क फ्रॉम होम के दौरान उन्होंने इस पर फोकस किया और खुद में आए शुरुआती बदलाव का महत्व समझा। इसके बाद खुद को दे डाली चुनौती। कभी 100 दिन लगातार ध्यान लगाने की तो एक दिन में 108 बार सूर्य नमस्कार की या फिर हाथों के बल पर संतुलन साधने की। खास है कि वे इस चुनौती को पूरा कर पाईं।  जानिए, लखनऊ की कुछ ऐसी महिलाओं और युवतियों के बारे में, जिन्होंने इन दिनों खुद को योग के कठिन से कठिन अभ्यास के लिए तैयार किया है। 

 
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ललिता प्रदीप, डायरेक्टर, एसआईईटी  - फोटो : अमर उजाला
108 बार किया सूर्य नमस्कार
ललिता प्रदीप, डायरेक्टर, एसआईईटी 
कोई भी आसन की शुरुआत पांच, दस या ज्यादा से ज्यादा 20 बार से की जाती है। मेरा मानना है कि कुछ करो तो बिल्कुल डूब जाओ। इसलिए मैं कोई भी मुद्रा कम से कम 50 बार जरूर करती हूं। हाल ही में मैंने 108 बार सूर्य नमस्कार पूरा किया है। 
योग का शौक कैसे: वर्ष 2000 से योग कर रही हूं। 2010 में नेचुरोपैथी के लिए बेंगलूरू गई। वहां अलग से योग की क्लास कर डाली। 2015 तक शरीर पूरी तरह लचीला हो गया। नागालैंड में योगा रिट्रीट किया। अगला ट्रिप राजस्थान का था, जहां सभी यूरोपियन थे। 
दर्द भी सहा: कभी पैरों की अंगुलियों के बल खड़े होना, कभी दोनों हाथों के पीछे से जोड़ना..., मुश्किल होता है, लेकिन मैंने सिखाने वालों से कहा कि दर्द मैं बर्दाश्त कर लूंगी और मैंने किया भी। 
 
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शालू बिजलानी - फोटो : अमर उजाला
खुद की तलाश पहाड़ों में
शालू बिजलानी, योगा इंस्ट्रक्टर
खुद की तलाश करने को मैंने देहरादून का रुख कर लिया है। तीन महीने का कोर्स करने यहां आई। लखनऊ में फिलहाल योग प्रशिक्षण का काम बंद है। एक शूट के सिलसिले में देहरादून आना हुआ था। बस उसी दौरान तय कर लिया कि फिलहाल ये समय में खुद की ग्रूमिंग पर व्यतीत करूंगी। हनुमान आसन, वृकासन, परिघासन,  वीरभद्रासन और धनुरासन जैसे आसन कठिन हैं, लेकिन जब आप इन्हें कर लेते हो तो शांति मिलती है। मैंने खुद कभी नहीं सोचा था कि मैं ये कर पाऊंगी। 

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प्राची जैन, बाइकर और सॉफ्ट स्किल ट्रेनर - फोटो : अमर उजाला
बकासन से पद्ममयूर आसन तक सब हुए आसान
प्राची जैन, बाइकर और सॉफ्ट स्किल ट्रेनर
शारीरिक शक्ति, संतुलन और अपने फोकस को परखना हो तो योग सबसे बेहतर जरिया है। पानी, खानपान पर नियंत्रण और नियमित योगाभ्यास आपके रास्तों को आसान कर देता है। पहले यूं ही योग करती थी, कभी किया और कभी नहीं किया। वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ तो इस पर गंभीरता से सोचना शुरू किया।
 
 
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प्राची जैन - फोटो : अमर उजाला
कुशल प्रशिक्षक बनने की ख्वाहिश 
मैं जिसे भी योग सिखाऊं, उसमें कोई कमी न रहे। इस दौरान घर से ही काम है तो बचा समय योगाभ्यास में लगा पाती हूं। हाल ही में मैंने शीर्षासन, बकासन, चक्रासन, पदममयूर आसन का संतुलन साधना सीखा है।
सूर्य नमस्कार से शुरुआत करें
योगाभ्यास की शुरुआत सूर्य नमस्कार से करनी चाहिए। एक आसन में 12 आसन का साइकिल होता है। मैंने दो महीने के अभ्यास के बाद 108 बार तक सूर्य नमस्कार कर लिया है।
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