लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें अवनीश मिश्रा की अलग पहचान थी। उन्होंने अपराध नियंत्रण के साथ ही यातायात पर बेहतरीन काम किया।
अवनीश मिश्रा राजधानी के उन गिने-चुने पुलिस अधिकारियों में थे जिन्होंने अपराध नियंत्रण के साथ ही नासूर बन चुकी यातायात समस्या पर भी फोकस किया। उनके समय में ही वीआईपी चौराहे हजरतगंज में सिग्नल से ट्रैफिक संचालन शुरू किया गया था। वर्ष 2001 बैच के पीपीएस अधिकारी अनवीश मिश्रा ने अपने कार्यकाल में कई उल्लेखनीय काम किए। उन्होंने वर्ष 2015 में कृष्णानगर सर्किल से राजधानी में अपना कामकाज शुरू किया। अपने मिलनसार व्यवहार से वह सबके प्रिय अधिकारी रहे।
उन्होंने सीओ ट्रैफिक के रूप में भी कई महीने काम किया। उनके कार्यकाल में ही हजरतगंज से एयरपोर्ट तक मेट्रो का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। उन्होंने मेट्रो के रूट का निरीक्षण कर उससे जुड़ी एक-एक गलियों का नक्शा तैयार किया। वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट कर सड़क के एक दिशा में सुगमतापूर्वक ट्रैफिक संचालन कराया। उन्होंने ही 28 रूट पर वन-वे व्यवस्था लागू कराई थी।
जब वह हजरतगंज सीओ बनाए गए, उस वक्त वीआईपी इलाके का ट्रैफिक संचालन मैनुअल होता था। यहां वीआईपी मूवमेंट के चलते काफी लोगों को लगाना पड़ता था। उन्होंने ही सबसे पहले सिग्नल से ट्रैफिक व्यवस्था चालू कराई। शुरुआत में दिक्कतें हुईं, लेकिन वर्तमान में हजरतगंज चौराहा पर सबसे बेहतरीन ट्रैफिक संचालन हो रहा है।
आईएएस की मौत के मामले की जांच में सीबीआई ने भी लगाई मुहर
हजरतगंज के मीराबाई मार्ग पर बीच सड़क मृत अवस्था में मिले कर्नाटक कॉडर के आईएएस अनुराग तिवारी की मौत के मामले की जांच अवनीश मिश्रा ने ही की थी। अनुराग के भाई ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। तत्कालीन एसएसपी दीपक कुमार ने एसआईटी गठित कर उस वक्त सीओ हजरतगंज रहे अवनीश मिश्रा को प्रभारी बनाया था। अवनीश मिश्रा ने हादसे में मौत की रिपोर्ट दी थी। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने भी आईएएस की मौत को हादसा ही बताया था।