बेटियों के साथ मुस्कुराते हुए सेल्फी लेना महज एक चित्र भर नहीं है। यह माता-पिता का अरमान भी है कि उसकी बेटी हमेशा मुस्कुराती रहे और मुस्कुराते हुए बेटी के चित्र की तरह ही उसकी जिंदगी भी हमेशा खुशहाल रहे। ...और ये खुशनुमा खूबसूरत लम्हे दोनों के जेहन में हमेशा चित्र की तरह अंकित रहें।
इसी सोच को जीवंत बनाने के लिए अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में ‘सेल्फी विथ डाटर’ का आयोजन किया गया। जिसमें माता-पिता ने कार्यस्थल पर क्लिक की गई तस्वीरें अमर उजाला से साझा की। (तस्वीर में लोहिया अस्पताल के निदेशक डा. डीएस नेगी अपनी बेटी रूपाली के साथ व केजीएमयू के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. दर्शन बजाज अपनी बेटी रीत बजाज के साथ।)
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि प्रो. अवनीश चंद्र मिश्रा, बेटी सुकन्या मिश्रा के साथ।
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- फोटो : amar ujala
आईईटी के प्रो. जेबी श्रीवास्तव, बेटी रिंकी श्रीवास्तव के साथ।
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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि डॉ. आलोक पांडेय, बेटी वैष्णवी पांडेय के साथ।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विवि की डॉ. अलका सिंह, बेटी आर्या सिंह के साथ।
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बीबीएयू डॉ. महेंद्र कुमार पाढ़ी, बेटी अभिप्षा भारतीय पाढ़ी व ऐश्वर्या अदिति पाढ़ी के साथ।
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जिन घरों में बेटियां नहीं होती है, वह घर अघूरा होता है। बेटियां घर में होेने से खुशीयां बढ़ जाती है। बेटियां मां-बाप व परिवार के प्रति काफी संवेदनशील होती है।
- टीसीएस कंपनी में इंजीनियर श्रुति चतुर्वेदी
पिता- डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी, बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक
स्थान- बलरामपुर अस्पताल
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बेटियों ने बढ़ाया है परिवार का मान
बेटों की अपेक्षा बेटियों ने परिवार का मान बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इसलिए बेटियों की पढ़ाई, उनके सपनों को पूरा करने में माता-पिता को भी पूरा प्रयास करना चाहिए। बेटों की तरह बेटियों के लालन-पालन और उनकी जरूरतों का ख्याल रखना चाहिए।
बेटी- श्रेष्ठा श्रीवास्तव
पिता- डॉ. एसके श्रीवास्तव, लोहिया अस्पताल
स्थान- लोहिया अस्पताल
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भेदभाव न करे
बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। जिस तरह बेटों की पढ़ाई और उनकी जरूरतों को पूरा करने में माता-पिता ज्यादा रुचि दिखाते हैं, उसी तरह बेटियों पर भी ध्यान दें, जिससे वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकें।
बेटी-ईशा सक्सेना
पिता- डॉ. वीआर सक्सेना, लोहिया अस्पताल
स्थान-लोहिया अस्पताल
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बेटी से ही जिंदगी है
बेटियों से ही जिदंगी है। बेटियां ही घर को आबाद किए हैं। बेटियों का हर घर में होना आवश्यक है। बेटी बिना परिवार अधूरा होता है। जिस घर में बेटियां होती है, उसमें कभी सुख- समृद्वि की कमी नहीं होती।
बेटी देवांशी
पिता- डॉ. देवाशीष , मनोरोग चिकित्सक, लोहिया अस्पताल