हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी के कत्ल की साजिश का ताना बाना तीन वर्षों से बुना जा रहा था। साजिश में शामिल आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए उसके हर पहलू पर कई बार गौर किया। गुजरात से शुरू हुई साजिश में शामिल लोगों को एक-एक कर जोड़ा गया।
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कमलेश तिवारी हत्याकांड।
- फोटो : amar ujala
मामले की जांच से जुड़ी एजेंसियों के अधिकारी इस जानकारी से अचंभे में हैं कि साजिश रचने वालों ने न सिर्फ वारदात को अंजाम देने के तरीके बल्कि मौके से फरार होने और इस पूरे मामले में हर कदम पर जरूरी मदद हासिल करने के लिए भी बिसात बिछाई हुई थी। कत्ल को अंजाम देने वाले किन-किन रास्तों से भाग सकते हैं और कहां किससे क्या मदद ली जानी है सब पहले ही तय कर लिया गया था।
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गुजरात में एटीएस की गिरफ्त में कमलेश तिवारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
अभी तक की पड़ताल में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि कमलेश तिवारी के एक बयान के बाद से ही उनके कत्ल का परवाना जारी कर दिया गया था। गुजरात एटीएस ने भी आईएसआईएस की विचारधारा से जुड़े जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया था उन्होंने भी इस बात को कबूला था।
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कमलेश तिवारी की मां और पत्नी
- फोटो : ANI
अब हत्याकांड की साजिश में शामिल फैजान, मौलाना मोहसिन शेख व रशीद पठान के गुजरात से पकड़े जाने और सैयद आसिम के नागपुर से गिरफ्तार किए जाने के बाद जो जानकारी सामने आई है उससे यह साबित हो गया है कि साजिश को अमली जामा तब पहनाया जाना शुरू हुआ जब अशफाक ने रोहित सोलंकी के नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर कमलेश तिवारी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी।
जांच एजेंसियों के अनुसार पूछताछ में सामने आया है कि कत्ल करने के लिए अशफाक और मोईनुद्दीन का चयन करने के बाद उन्हें ताकीद की गई थी कि वे कमलेश तिवारी की मौत सुनिश्चित करने के बाद ही मौके से हटें। यही वजह थी कि हत्यारों ने कमलेश पर गोली भी चलाई, चाकू से कई बार वार कर गला भी रेत दिया था।