आखिरकार 21 दिन बाद ऐतिहासिक बड़ा इमामबड़ा का ताला देर रात खुल गया। शिया वक्फ बोर्ड में वर्चस्व की लड़ाई में 5 जून से यहां ताला पड़ा हुआ था।
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जव्वाद के आगे झुका प्रशासन तो खुला इमामबाड़े का ताला
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुक्रवार को प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल और डीएम राजशेखर शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद के घर पहुंचे और बातचीत कर धरना खत्म करने के लिए मना लिया।
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वहीं, जिला प्रशासन से बातचीत के बाद बड़े इमामबाड़े का ताला खुलवाने वाले शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने छोटे इमामबाड़े पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने छोटा इमामबाड़ा पर चल रहे महिलाओं से प्रदर्शन खत्म करने को कहने से साफ इन्कार करते हुए कहा कि प्रशासन इन्हें खुद मनाए। (बड़े इमामबाड़ा पर मौजूद जव्वाद के समर्थक।)
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शुक्रवार देर रात मौलाना के घर पहुंचे प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल और डीएम राजशेखर ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, इमामबाड़ा में धार्मिक आस्था को बरकरार रखने और हुसैनाबाद इलाके में धार्मिक आयोजन के समय बैनर-पोस्टर लगाने पर लगी पाबंदी को हटाने का भी निर्णय लिया। प्रशासन ने एक उलेमा कमेटी बनाने का भी आश्वासन दिया है जोकि पूरे मामले की निगरानी करेगी।
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पहले नोटिस लेने से किया इन्कार इससे पहले शुक्रवार को इमामबाड़े के गेट पर तालाबंदी कर धरना प्रदर्शन कर रहे शिया समुदाय के लोगों ने ताला खुलवाने की नोटिस तामील कराने पहुंचे अफसरों का विरोध किया और इसे लेने से इन्कार कर दिया।
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लोगों ने कहा कि वे मौलाना कल्बे जव्वाद की अनुमति के बिना किसी भी तरह की कोई नोटिस लेना स्वीकार नहीं करेंगे। पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे एडीएम पश्चिमी, एसीएम द्वितीय भी प्रदर्शनकारियों को नहीं मना सके। (जब इमामबाड़े का दरवाजा खोला गया उस समय भारी संख्या में कल्बे जव्वाद के समर्थक मौजूद थे।)
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बाद में प्रशासनिक अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए तालाबंदी खुलवाने का नोटिस दीवार पर चस्पा कर लौट आए। इसमें साफ तौर पर चेताया गया था कि यदि धरना प्रदर्शन खत्म कर ताले नहीं खोले गए तो धरने पर बैठे लोगों को इसका दोषी मानकर कार्रवाई की जाएगी। दोपहर में नोटिस चस्पा होने के बाद शाम को प्रशासन ने फिर पहल की और देर रात बड़े इमामबाड़े का ताला खुल गया।
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आज से संवेदनशील इलाकों की निगरानी करेंगे मजिस्ट्रेट शिया समुदाय में किसी भी तरह के आक्रोश व नाराजगी से निपटने के लिए जिलाधिकारी राजशेखर ने शनिवार से पुराने लखनऊ के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सर्तकता बरतने के साथ ही मजिस्ट्रेट की निगरानी में सुरक्षा बल तैनात कराने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है। (इमामबाड़े का ताला खोलने के समय जव्वाद समर्थकों को सम्बोधित करते जिलाधिकारी राजशेखर।)
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जिलाधिकारी ने बताया कि सेक्टर व जोन स्तर पर नामित एडीएम व एसीएम को अपने अपने क्षेत्रों की निगरानी कर शांति व्यवस्था को खतरा बनने वाली हर छोटी बड़ी घटना पर नजर रखने को निर्देशित किया गया है। (प्रशासन द्वारा जव्वाद की मांगों पर अमल किए जाने की बात जानकार काफी उत्साहित दिखे उनके समर्थक।)
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मामले पर डीएम राजशेखर ने कहा‘हुसैनाबाद ट्रस्ट के अधीन आने वाले पर्यटन स्थलों पर किसी प्रकार धार्मिक भावनाएं आहत न होने दी जाएंगी। उलमा की निगरानी कमेटी बनायी जाएगी जो समय-समय पर हुसैनाबाद ट्रस्ट के काम की निगरानी करेगी। साथ ही मजहबी बैनर-पोस्टर लगाने की इजाजत धार्मिक आयोजनों के दौरान ही रहेगी।’(इमामाबाड़े के गेट के पास जव्वाद समर्थक।)