यह साल उस क्षण का गवाह बन ही गया, जिसका इंतजार रामभक्त 492 वर्ष से कर रहे थे। अयोध्या में जिस श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को मुगल शासक बाबर की शह पर वर्ष 1528 में तोड़ दिया गया था, पीएम नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को उसी मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया।
कोरोना महामारी की दुश्वारियों के बीच वर्ष 2020 पिछले वर्ष के फैसलों को जमीन पर उतारने के लिए भी याद रहेगा। भगवान राम और अयोध्या से जुड़े फैसलों से फुरसत मिलने और इस पर वर्षों से हो रही सियासत पर विराम के लिए भी यह साल यादगार रहेगा।
इस वर्ष को याद किया जाएगा लगभग 500 साल पुराने राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान को साकार स्वरूप देने के लिए नरेंद्र मोदी के पहले प्रधानमंत्री के रूप में राम जन्मभूमि गर्भगृह पर आने और इतिहास बनाने के लिए। हिंदुत्व के एजेंडे पर राजनीतिक संकल्पों को जमीन पर उतारने के लिए।
यह साल आने वाली पीढ़ियों को स्मरण भी कराएगा कि जो मुस्लिम समाज 2019 के उत्तरार्ध तक मस्जिद के लिए न्यायालय में पैरवी कर रहा था, उसी के तमाम लोगों ने संबंधित स्थान पर मंदिर निर्माण की शुरुआत का खुले दिल से स्वागत किया। यह साल ढांचा ध्वंस मामले पर 28 साल से चल रहे मुकदमे में 9 मिनट के फैसले के लिए भी याद रखा जाएगा।
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दीपोत्सव की फाइल फोटो
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कोरोना व लॉकडाउन जैसी चुनौतियों के बीच प्रदेश सरकार के सांस्कृतिक व धार्मिक पर्यटन के सहारे हिंदुत्व के एजेंडे को और परवान चढ़ाने का काम पहले की तरह इस साल भी जारी रहा। अयोध्या में दीपोत्सव का एक और रिकॉर्ड बनाने के बीच पर्यटन के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए भी यह साल स्मरण रहेगा तो काशी की विश्वविख्यात देव दीपावली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की भागीदारी के लिए भी।
यह साल इस कसक के लिए भी याद रखा जाएगा कि जन्मभूमि स्थल पर सफाई के काम, रामलला के विग्रह को मौजूदा गर्भगृह से दूसरे स्थान पर निर्मित अस्थायी मंदिर में लाने के ऐतिहासिक अनुष्ठान के बावजूद मंदिर निर्माण की विधिवत शुरुआत नहीं हो पाई। तमाम कोशिशों, भूमि मिलने तथा नक्शा बनने के बावजूद 2020 नई निर्मित होने वाली मस्जिद की शुरुआत भी नहीं हो सकी।
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- फोटो : पीएमओ
अयोध्या बैठक से मंदिर को आकार: कोरोना के कहर के बीच अयोध्या में मंदिर की शुरुआत की कई चर्चाएं चलीं। चर्चा सार्वजनिक हुई कि प्रधानमंत्री मोदी 30 अप्रैल को वर्चुअल श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की शुरुआत कर देंगे। पर, मंदिर आंदोलन की सूत्रधार विहिप ने साफ किया कि पीएम को औपचारिक निमंत्रण दिया जाएगा। उसके बाद उनकी तरफ से निश्चित तारीख पर उनके हाथों मंदिर निर्माण की विधि विधान से शुरुआत होगी।
ट्रस्ट की अयोध्या में 18 जुलाई की बैठक में मंदिर निर्माण की योजना को आकार देने का काम हुआ। प्रधानमंत्री को निमंत्रण दिया गया और पीएमओ से 5 अगस्त का मुहूर्त मंदिर निर्माण की शुरुआत के लिए निश्चित हुआ। दिव्यता के साथ भव्यता देने के लिए मंदिर के आकार-प्रकार में बदलाव भी किया गया, जिसके अनुसार मंदिर की ऊंचाई 128 से बढ़ाकर 161 फीट और इसे दो से बढ़ाकर तीन मंजिला कर दिया गया।
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- फोटो : पीएमओ
फैसलों का फलादेश: वर्ष 2019 जहां मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर तमाम शंकाओं के साथ शुरू हुआ थी, वहीं 2020 की शुरुआत इस मुद्दे पर बीते वर्ष के अंत में आए सबसे बड़ी अदालत के फैसले का फलादेश समझने के साथ हुई।
- तमाम अटकलों के बाद 5 फरवरी उस समय इतिहास में दर्ज हो गई जब मंदिर-मस्जिद जैसे संवेदनशील विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसलों को जमीन पर उतारने के क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का हवाला देते हुए मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की घोषणा की।
- साथ ही ट्रस्ट को 90 के दशक में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत अयोध्या की 67 एकड़ और मुकदमे वाली 2.77 एकड़ भूमि ट्रस्ट को सौंपते हुए हिंदुत्व के एजेंडे पर टस से मस न होने का संकेत दे दिया।
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- फोटो : पीटीआई
- प्रदेश की योगी सरकार ने भी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश को अमली जामा पहनाते हुए अयोध्या के सोहावल के पास धन्नीपुर गांव में मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन सौंपकर अपना दायित्व पूरा किया।
- खास बात यह भी रही कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस जमीन पर बनने वाली मस्जिद का नाम बाबरी के नाम पर न रखने की घोषणा कर भावी पीढ़ी को इस विवाद से दूर रखने की पहल की। हालांकि इस मस्जिद को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच मतभेदों का समाधान साल के अंत तक नहीं हो पाया।
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नींव पर अभी इंतजार: प्रधानमंत्री के हाथों रामलला की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की औपचारिक शुरुआत तो हो गई, लेकिन तमाम तकनीकी अड़चनों के कारण नींव का निर्माण नहीं हो पाया। विशेषज्ञों ने पहले पाइलिंग पद्धति पर पिलर खड़े कर उस पर मंदिर का ढांचा बनाने की सोची थी, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया। लिहाजा आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक वीएस राजू की अध्यक्षता वाली कमेटी को पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई। फिलहाल कमेटी ने नींव को लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन अभी नींव के निर्माण पर फैसला होना बाकी है। जाहिर है कि धार्मिक अनुष्ठान के साथ मंदिर निर्माण की सांकेतिक शुरुआत भले ही 2020 में हो गई हो लेकिन उसे साकार स्वरूप मिलना 2021 में ही शुरू हो पाएगा।
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संतों का मिला साथ: प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्रस्ट के 15 सदस्यीय होने की घोषणा करते हुए नौ के नाम घोषित किए। इन नामों पर विवाद खड़ा हो गया। खासतौर से मंदिर आंदोलन के समय से ही चले आ रहे श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट में जगह न मिलने पर गुस्सा सार्वजनिक हुआ।
अयोध्या के संतों के रूख से सांसत में फंसी केंद्र सरकार ने आखिरकार विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय के जरिये नृत्यगोपाल से बातचीत कर स्थिति संभाली और उन्हें दिल्ली में 19 फरवरी को आयोजित ट्रस्ट की बैठक का न्यौता देकर यह संदेश दिया कि भाजपा का एजेंडा स्पष्ट है। संत भी सरकार के आश्वासन पर संतुष्ट नजर आए।
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अस्थाई मंदिर में पहुंचे रामलला।
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तिरपाल से निजात: सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के चलते यह साल रामलला टाट में, भाजपा वाले ठाट में जैसे नारों पर विराम लगाने का भी साक्षी बना। चैत्र नवरात्र के पहले दिन लॉकडाउन व कोरोना के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 साल बाद सुबह 4:30 बजे ब्रह्म मुहूर्त में रामलला के विग्रह को गोद में लेकर तिरपाल के नीचे से उठाकर स्थायी मंदिर बनने तक मानस भवन के पास बने अस्थायी मंदिर में विराजित किया। योगी के इस कार्य के साथ लोगों के दिमाग में उन क्षणों का एक चित्र घूम गया जब उनके दादा गुरु महंत दिग्विजय नाथ अन्य चार संतों के साथ रामलला के प्रगटीकरण के सूत्रधार बने होंगे।
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सपना हुआ साकार: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण के सपने को साकार रूप देने के लिए भी इतिहास में इस साल को हमेशा याद किया जाएगा। जो बताएगा कि इस साल की 5 अगस्त की तारीख करोड़ों हिंदुओं के रामलला की जन्मभूमि मंदिर पर निर्माण की प्रधानमंत्री मोदी के हाथों शुरुआत की साक्षी बनी थी।
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धोती-कुर्ता और गमछा गले में डाले मोदी ने प्रधानमंत्री से ज्यादा एक आम हिंदू आस्थावान भक्त की तरह रामलला के सामने साष्टांग दंडवत होते हुए यह संदेश दिया था कि वह धर्मदंड के नीचे ही राजसत्ता चलाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। भले ही कोई कितनी भी आलोचना करे।
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मंदिर निर्माण के लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागतव, महंत नृत्यगोपाल दास और मंदिर आंदोलन के शिल्पी स्व. अशोक सिंहल के परिवार के सदस्यों के साथ निर्माण की शुरुआत को चांदी की शिला सहित अन्य शिलाएं रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जय सियाराम, सबके राम-सबमें राम का नारा देकर यह समझाने की कोशिश की कि देश की राजनीति में वे दिन लद चुके हैं जब लोगों को हिंदुत्व और मंदिर के नाम के साथ ही सांप्रदायिकता का डर और अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि पर खरोंच आने का भय सताने लगता था। उनकी सरकार तो राम राज्य की कल्पना पर ही सरकार चलाने को संकल्पबद्ध है।
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हनुमान गढ़ी में पूजन करते पीएम मोदी
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70 साल संघर्ष से फैसले तक
- 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में रखी गई थी राम मंदिर मुद्दे की नींव
- 76 युद्ध लड़े जा चुके थे तब तक इस स्थल की मुक्ति के लिए
- 2 नवंबर, 1990 को कारसेवकों पर अयोध्या में चली थी गोलियां
- 6 दिसंबर, 1992 को हजारों कारसेवकों ने विवादित ढांचा ढहाया
- 30 सितंबर, 2010 को हाईकोर्ट ने इस स्थल को तीनों पक्षों में बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया
- 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल को श्रीराम जन्मभूमि माना। मुस्लिम पक्षकार व निर्मोही अखाड़ा का दावा खारिज कर दिया।
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बनने वाली मस्जिद का नया डिजाइन।
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मतभेद के बीच मस्जिद: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन दे दी और 2020 के जाते-जाते इसके आकार-प्रकार की तस्वीर भी स्पष्ट हो गई। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में बनने वाली इस मस्जिद में बाबर या उससे जुड़ा कोई जिक्र न करने और किसी भाषा या राजा के नाम न जोड़ने की घोषणा कर यह संदेश देने की कोशिश की कि वे बाबर से अपनी पहचान जोड़ने के पक्षधर नहीं हैं।
मस्जिद के लिए बने इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और मस्जिद परियोजना के वास्तुविद एसएम अख्तर ने इसका मॉडल जारी कर बताया कि इस जमीन पर मस्जिद व अस्पताल की दो इमारतें बनेंगी। साथ में लाइब्रेरी, म्यूजियम और कम्युनिटी किचन भी बनाया जाएगा। मस्जिद में गुंबद नहीं होंगे। इसमें 2000 लोग एक साथ नमाज अदा करेंगे। इसका शिलान्यास 26 जनवरी या 15 अगस्त को करने का संकेत दिया गया।
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हालांकि अभी यह देखना बाकी है कि मस्जिद को गैर इस्लॉमिक बता रहे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी इस पर क्या रुख अपनाते हैं। लेकिन, मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह बात तो साफ है कि मंदिर की तरह मस्जिद निर्माण की विधिवत शुरुआत अब 2021 में ही हो पाएगी।
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लाल कृष्ण आडवाणी
ढांचा ध्वंस में सब बरी: 2019 जहां देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले से मंदिर-मस्जिद विवाद के समाधान का साक्षी बना तो 2020 का मध्य इसी विवाद के दूसरे महत्वपूर्ण और बड़े मुकदमे ढांचा ध्वंस के मामले में फैसले का साक्षी बना। संसार के सर्वथा अपने तरीके के इकलौते मामले में 28 साल चले मुकदमे में सीबीआई अदालत ने मात्र नौ मिनट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, विनय कटियार, उमा भारती सहित सभी जीवित 32 आरोपियों को बरी कर दिया और यह टिप्पणी करते हुए कि ढांचा ढहाने में इनकी कोई भूमिका नहीं थी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : Twitter
प्रतीकों के सहारे सरोकारों पर सलीके से संदेश देने में माहिर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रस्ट की बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंचे संतों का अपने आवास पर स्वागत किया। महंत नृत्यगोपाल दास को अपने निकट बैठाकर यह संदेश दे दिया कि संतों की अगुवाई में ही राम मंदिर के काम की शुरुआत होगी।
दिल्ली में ट्रस्ट की पहली बैठक में ही नृत्यगोपाल दास को सर्वसम्मति से अध्यक्ष नियुक्त करके भी यह बताने की कोशिश की गई कि भाजपा सरकार मंदिर आंदोलन के संघर्ष में सक्रिय संतों का योगदान भूली नहीं है। सांस्कृतिक एजेंडे के सरोकारों पर सरकार पूरी तरह समर्पित है। संतों ने भी ट्रस्ट की पहली बैठक के जरिये प्रधानमंत्री मोदी को अयोध्या आकर मंदिर निर्माण की शुरुआत करने का न्यौता देकर यह बताने की कोशिश की कि भाजपा व मोदी पर उनका भरोसा पूर्ववत बरकरार है।
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वाराणसी की देव दीपावली।
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटन से भी एजेंडे को परवान:अयोध्या में मंदिर की शुरुआत करने के बाद पीएम ने देव दीपावली पर वाराणसी पहुंचकर फिर पर्यटन के एजेंडे से सरोकारों को धार दी। उन्होंने विश्वनाथ धाम में रुद्राभिषेक के साथ गंगा आरती के अलावा दीपक जलाकर देव दीपावली के सांस्कृतिक अनुष्ठान से भी खुद को सरोकारों से जोड़ा।
कोरोना व लॉकडाउन की बाधाओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां अयोध्या में बनने वाले हवाई अड्डे, तुलसी स्मारक भवन के जीर्णोद्धार और पर्यटन की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए करोड़ों रुपये देकर आस्था पर समर्पण और इससे जुड़े स्थानों पर सुविधाओं के विस्तार का संदेश दिया।
भाजपा के सांसदों व विधायकों ने बड़े-बड़े अभिनेताओं के साथ अयोध्या में रामलीला करके राम नाम पर समर्पण के साथ संस्कृति व सांस्कृतिक मामलों पर प्रतिबद्धता का संकल्प दोहराया। हमेशा की तरह मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में अयोध्या के दीपोत्सव ने दीपों की संख्या का एक और नया रिकॉर्ड बनाया। अयोध्या के रेलवे स्टेशन का विस्तार और उसका आकार राम जन्मभूमि की तरह करने के फैसलों के साथ भी पर्यटन से जुड़े अनेक कामों से भी एजेंडे को धार देने काम पूरे साल चलता रहा।