बालों में प्लेट्स बनाकर दो चोटियां, वही पुराना यूनिफॉर्म और उस पर भी स्कूल प्रशासन की पैनी नजर। नाखून बड़े नहीं तो बाल पूरी तरह पिनअप हों। हेयर बैंड के रंग से लेकर मेकअप से लंबी दूरी... इतना सख्त अनुशासन। लेकिन ये सब अब नहीं चलेगा...। अब तो कॉलेज लाइफ होगी और अपना ग्लैमर और टशन चलेगा। खुद को मन मुताबिक, आउटलुक तैयार करने का मौका मिलेगा, फुल मेकअप की आजादी भी। कॉलेज लाइफ को लेकर कुछ ऐसी ही तैयारी में हैं शहर की बेटियां। इंटरमीडिएट के बाद जहां एक ओर कड़े अनुशासन से छुटकारा मिला है, वहीं अपने लुक को लेकर भी लड़कियों में काफी खुशी नजर आ रही है। कैसे तैयार कर रही हैं वो खुद को कॉलेज लाइफ के लिए। पेश है खास रिपोर्ट-
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छाया सिंह
- फोटो : अमर उजाला
एसेसरीज रहेंगी खास
सिर्फ कॉलेज ही वो समय होता है जिसमें हम खुलकर स्टाइलिंग कर सकते हैं। इंटरमीडिएट तक हमारा स्कूल यूनिफॉर्म होता है। वहीं कॉलेज के बाद अगर हम जॉब जॉइन करते हैं तो दोबारा हमें फॉर्मल्स अपनाना पड़ता है। इसलिए मैं अपनी कॉलेज लाइफ में पढ़ाई के साथ अपने आउटलुक के लिए भी विशेष तैयारियां करूंगी। मुझे विभिन्न स्टाइलिश हैंड बैग्स और अन्य बॉडी एसेसरीज खासी पसंद है। चाहे वो ब्रेस्लेट्स हों या फंकी ज्वेलरी। बेशक पढ़ाई प्राथमिकता पर होगी लेकिन लुक भी मायने रखता है। - छाया सिंह
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तनुष्वी सक्सेना
- फोटो : अमर उजाला
ओल्ड लुक को बाय-बाय
मैंने इंटरमीडिएट पास किया है और अब बीए में एडमिशन ले रही हूं। मेरा मानना है कि स्कूल के लिए बेशक यूनिफॉर्म जरूरी होता है। यूनिफॉर्म डिसिप्लिन को दर्शाता है। लेकिन अगर बात कॉलेज लाइफ की करें तो यह थोड़ा हटकर है। कॉलेज में आने तक स्टूडेंट्स में काफी मैच्योरिटी आ जाती है। और इस ऐज में खुद को अपडेट कर रखना जरूरी होता है। सबसे पहले आपका लुक ही आपको दर्शाता है। हम करीब 12-14 वर्षों तक स्कूल यूनिफॉर्म में ही रहते हैं। कॉलेज को लेकर हर स्टूडेंट में एक्साइटमेंट होता है, मेरी भी कॉलेज लाइफ शुरू हुई है और मैं भी इसे लेकर काफी उत्साहित हूं। - तनुष्वी सक्सेना
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कल्यानी अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
अपने आप को ग्रूम करने का चांस
मैंने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया है और अब बीए में प्रवेश लेने की तैयारी है। कॉलेज में जाने के लिए मैं थोड़ा नवर्स भी हूं और बहुत खुश भी। इंटरमीडिएट तक तो सख्त अनुशासन के कारण कभी ग्रूमिंग का मौका ही नहीं मिल पाता था। लेकिन अब कॉलेज में इन बंदिशों से राहत मिलेगी। पढ़ाई के साथ जहां खुद के लिए थोड़ा समय मिलेगा वहीं यूनिफॉर्म से हटकर सिविल ड्रेस और ग्रूमिंग का भी चांस रहेगा। अपने कैजुअल लुक को लेकर मैंने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। कॉलेज में मैं कैजुअल्स का कूल लुक ट्राई करूं इसके लिए मुझे खासा इंतजार भी है। - कल्यानी अग्रवाल
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आयुषि उपाध्याय
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चोटी बनाने से मिलेगा छुटकारा
मैंने इसी साल इंटरमीडिएट किया है और अब लॉ के लिए एडमिशन की तैयारी कर रही हूं। कॉलेज लाइफ के लिए मैं काफी एक्साइटेड भी हूं, मुझे इसका शिद्दत से इंतजार था। स्कूल में या इंटरमीडिएट तक ड्रेस कोड (यूनिफॉर्म) से लेकर हेयरस्टाइल तक अनुशासन में बंधा होता था। खासकर वो ऑयलिंग करके दो चोटियां बनाना। कॉलेज में पढ़ाई के साथ खुद को अपने हिसाब से तैयार होने का अधिकार होगा, खासकर चोटी के बजाए मनपसंद हेयरस्टाइल करने का मौका रहेगा। - आयुषि उपाध्याय
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अनन्या सिंह
- फोटो : अमर उजाला
खुद को ड्रेसअप करने का मौका
मैंने जीडी गोयनका इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया है और अब दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस विषय में बैचलर्स में दाखिला ले रही हूं। ग्रेजुएशन में आने के बाद लाइफ में काफी कुछ बदल जाता है। कॅरिअर के नए चैलेंजेस के साथ खुद को नए माहौल में ढालने की भी जिम्मेदारी। लेकिन जो सबसे अच्छा होता है वो खुद अपने हिसाब से अपना आउटलुक चुनने का मौका है। यूनिफॉर्म का झंझट नहीं रहता, कैजुअल्स में खुद को ड्रेसअप करने का कांफीडेंस ही अलग होता है। मुझे बेसब्री से इसका इंतजार है। - अनन्या सिंह
नेल्स हों या हेयरस्टाइल, रोक-टोक नहीं
हमें नाखून छोटे रखने हैं, नाखूनों पर नेल पेंट नहीं लगाना है। बालों की लंबाई ज्यादा नहीं हो सकती। बालों को अच्छे से पिनअप कर के रहना। कॉलेज लाइफ में इसे लेकर कोई रोक-टोक नहीं होगी। ड्रेसिंग सेंस से लेकर स्टाइल और ग्रूमिंग तक के लिए कोई रोकने वाला नहीं होगा। अपनी मर्जी से खुद को तैयार करना सच में बहुत अलग एहसास है। हर स्टूडेंट को इसके लिए स्कूल समय से ही इंतजार होता है। मैंने भी इसी वर्ष इंटीमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की है और अपनी कॉलेज लाइफ को लेकर काफी उत्साहित और खुश हूं। भविष्य के प्रति नई जिम्मेदारियों के साथ नई स्टाइल का भी इंतजार है। - महक अग्रवाल