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जेल में ऐशोआराम पाने के लिए कोशिश कर रहा गायत्री, जानें- कैसा गुजर रहा वक्त

Sat, 18 Mar 2017 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
महिला और उसकी बेटी से गैंगरेप व यौन शोषण के आरोप में जेल में बंद पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति शुक्रवार को बैरक बदलवाने के जुगाड़ में लगा रहा। जेल के बाहर पूर्व मंत्री के करीबी भी इसी दौड़-धूप में जुटे रहे। जेल प्रशासन को महकमे के दो बड़े अधिकारियों से फोन कराया गया, लेकिन गायत्री को कोई राहत नहीं मिली।
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सूत्रों ने बताया कि गायत्री ने जेल में सहूलियतों के लिए हर जुगाड़ और सिफारिश लगाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। थक-हारकर शुक्रवार को मुलाहिजा बैरक के बंदी रक्षकों से बैरक बदलने के नियमों के बारे में जानकारी लेता रहा। बंदी रक्षकों ने उसे बताया कि नए बंदियों को जेल के तौर-तरीके सिखाने के लिए दस दिन तक मुलाहिजा बैरक में रखा जाता है।
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निर्धारित समयावधि के बाद बंदी को किसी दूसरी बैरक में शिफ्ट करते हैं। अभी उसे आठ दिन और मुलाहिजा बैरक में बिताने हैं। गायत्री को यह भी डर है कि छह दिन बाद उसके साथी विकास वर्मा, रूपेंद्र व अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह बैरकों में शिफ्ट हो जाएंगे तो वह अकेला रह जाएगा। इससे बचने के लिए वह जल्द किसी बैरक में शिफ्ट होना चाहता है। उसका प्रयास यह भी है कि तीनों साथी भी उसके साथ ही बैरक में रहें। उसने जेल के दो पूर्व आला अधिकारियों से फोन भी कराए, लेकिन बात नहीं बनी।

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मिलने नहीं आए घर वाले
गायत्री को जेल गए दूसरा दिन होने वाला है, लेकिन उसके परिवार का कोई भी सदस्य अभी तक मिलने नहीं आया। शुक्रवार को कुछ लोगों ने मुलाकात के लिए पर्ची लगाई, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें लौटा दिया।
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सूत्रों ने बताया कि अमेठी के रामगढ़ से शेर बहादुर सिंह, अरविंद सिंह और राजेंद्र सिंह तथा लखनऊ के इंदिरानगर निवासी विजय प्रताप सिंह, जितेंद्र कुमार व अनिल कुमार ने मुलाकात के लिए पर्ची लगाई थी। जेल अधिकारियों ने कहा कि बृहस्पतिवार को गायत्री से दो लोगों की मुलाकात कराई गई थी, इसलिए शुक्रवार को आने वालों को लौटा दिया गया।
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रमने लगा जेल के माहौल में
प्रजापति धीरे-धीरे जेल के माहौल में रमने लगा है। बृहस्पतिवार रात उसने भरपूर नींद ली। शुक्रवार सुबह उठकर स्नान व पूजा-पाठ करने के बाद दोपहर के भोजन में उड़द की दाल, राजमा और आलू बैगन की सब्जी के साथ रोटी और चावल खाया। वह अपना खाना खुद ही लेने गया। शाम को उसने अरहर की दाल, आलू-बैगन की सब्जी के साथ सिर्फ एक रोटी खाई।
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