आतंकी संगठन आईएस का लखनऊ-कानपुर खुरासान ग्रुप तैयार करने वाले मास्टर माइंड गौस मोहम्मद खान को एटीएस व एसटीएफ की संयुक्त टीम ने राजधानी के पीजीआई इलाके से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, इस पूरे आतंकी ग्रुप को असलहे मुहैया कराने वाले अजहर को एटीएस ने बृहस्पतिवार को कानपुर में दबोच लिया। मास्टरमाइंड गौस ने राजधानी की हाजी कॉलोनी में संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर वाले दिन नहीं था और अपनी आंखों से पूरी मुठभेड़ देखा था।
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मूलत: रायबरेली का रहने वाला गौस उर्फ जीएम खान भारतीय वायुसेना में एयर मैन के रूप में 15 साल तक नौकरी कर चुका है। 1993 में उसने वीआरएस ले लिया था। पुलिस का दावा है कि खुरासान मॉड्यूल जीएम खान ने ही तैयार किया था। इसका काम युवाओं को गुमराह करना, उन्हें ट्रेनिंग देना और आईएस से जुड़े साहित्य उपलब्ध कराना था। एडीजी कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी ने दवा किया है कि खुरासान ग्रुप को एटीएस, एसटीएफ ओर पुलिस ने नष्ट कर दिया है।
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पुलिस की गिरफ्त से अब केवल एक युवक रॉकी रानावत ही दूर है, जो असलहे उपलब्ध कराने का काम करता था। हाजी कॉलोनी में ढेर हुए आतंकी सैफुल्लाह के पास से मिले सूबूतों और कानपुर व मप्र में गिरफ्तार संदिग्ध आतंकियों की पूछताछ में पता चला है कि गौस खुरासान ग्रुप का मास्टरमाइंड है।
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पूरा गैंग बर्स्ट
एडीजी कानून-व्यवस्था दलजीत सिंह चौधरी ने बताया कि स्व घोषित आईएसआईएस के इस पूरे ग्रुप को बर्स्ट कर दिया गया है। ग्रुप के दस सदस्यों में से नौ को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब केवल एक सदस्य रॉकी रानावत बचा है। रॉकी असलहे उपलब्ध कराता था। उन्होंने बताया कि सैफुल्लाह को जिसने प्रेरित किया था जीएम खान ग्रुप का सरगना था। उन्होंने बताया कि ग्रुप में शामिल दानिश अख्तर, आतिफ मुजफ्फर और सैयद मीर हुसैन मध्यप्रदेश में गिरफ्तार हो चुके हैं। दानिश का भाई फैसल कानपुर से गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि फकरे आलम को इटावा से और शैलेंद्र यादव को औरैया के विधूना से गिरफ्तार किया गया था। गुरुवार को जीएम खान और अजहर सदस्यों को पकड़े जाने के बाद यह पूरा ग्रुप या गैंग बर्स्ट किया जा चुका है। सैफुल्लाह को लखनऊ में एटीएस ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
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उपलब्ध कराता था प्रतिबंधित किताब और सीडी
एडीजी ने बताया कि गौस मोहम्मद खान ने आईएसआईएस की प्रतिबंधित किताब दविक की प्रेरित युवकों को उपलब्ध कराता था। इसके अलावा आईएसआईएस से जुड़े अन्य साहित्य सीडी के जरिए उपलब्ध कराता था। कानपुर से हिरासत में लिए गए इमरान का पूरे मामले में रोल सकारात्मक रहा। उसके मोबाइल की छानबीन करने और कड़ी पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया।
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असलहे सप्लाई करता था अजहर
गिरफ्तार किया गया अजहर इस ग्रुप के लोगों को असलहे उपलब्ध कराता था। उस पर आरोप है कि वह शैलेंद्र और रॉकी रानावत के साथ मिलकर इस ग्रुप के एक अन्य सदस्य फकरे आलम को असलहे उपलब्ध कराता था।
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सात मार्च को जब एटीएस के कमांडो काकोरी के हाजी कॉलोनी में सैफुल्लाह केसाथ मुठभेड़ कर रहे थे तो जीएम खान बाहर खड़ा तमाशा देख रहा था। पुलिस की बढ़ी चहल-पहल के बाद वह धीरे से वहां से निकल गया था। सूत्रों की मानें तो वह किसी काम से घर के बाहर निकला था। जब वापस आया तो दरवाजे पर एटीएस के कमांडो मोर्चा लिए हुए थे। वहां लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। एटीएस और पुलिस दोनों का ध्यान सिर्फ उस घर पर था जिसमें सैफुल्लाह छिपा हुआ था।
बाहर मोर्चा लिए एटीएस के आईजी असीम अरुण और उनके कमांडो को भी नहीं पता था कि अंदर कितने संदिग्ध हैं। सूत्रों की मानें तो ऑपरेशन से पहले एटीएस ने जब लोकेशन ट्रेस की थी, तो भी जीएम खान की लोकेशन वहीं पर मिली थी। यही वजह थी कि पुलिस के अधिकारी भी भ्रम में थे कि संदिग्ध की संख्या एक है या दो। आपरेशन के दो दिन के बाद लखनऊ के पास पीजीआई थानाक्षेत्र से गौस मोहम्मद को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया।