एक अन्य दृश्य में राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ के साथ मंत्रणा कर रहे होते हैं। वे गुरुदेव से कहते हैं कि गुरुदेव मेरे कानों के बाल सफेद हो गए हैं, अब मेरा बुढ़ापा चरम सीमा पर है। अब मेरी एक ही अभिलाषा है, रामचंद्र सब प्रकार से योग्य हो गए हैं, उन्हें राज भार सौंप दिया जाए। गुरु वशिष्ठ उनकी इच्छा का अनुमोदन करते हैं और कहते हैं कि हे! राजन राम के राजतिलक की तैयारी करवाइए। अगले दृश्य में प्रजावासी राम के राजतिलक की खुशी में नाच रहे होते हैं।