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वाराणसी हादसा Updates: चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर समेत चार सस्पेंड, तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

Wed, 16 May 2018 09:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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हादसा - फोटो : amar ujala
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने वाराणसी में हुए हादसे में चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एचसी तिवारी समेत चार लोगों को सस्पेंड कर दिया है। वे वाराणसी में देररात तक घायलों से मिलते रहे। साथ ही विभागीय अधिकारियों के साथ रात में ही इस परियोजना में हुई लापरवाही की समीक्षा की, जिसेक बाद चार लोगों को सस्पेंड करने के निर्देश दे दिए। इसके अलावा आगे की जांच के लिए तीन सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन भी कर दिया गया है।

केशव मौर्य ने देर रात अमर उजाला को बताया कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एचसी तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर केआर सूदन, एई राजेंद्र सिंह और जेई लाल चंद को निलंबित कर दिया गया है। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर वाईके गुप्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय तकनीकी कमेटी बनाई गई है। इसमें सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक वाईके शर्मा और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता, इलाहाबाद एसके गुप्ता को सदस्य बनाया गया।
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आपको बता दें कि वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन के पास हुए दर्दनाक हादसे में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के बीम गिरने से 18 लोगों की दबकर मौत हो गई। मामले में चीफ मैनेजर सहित चार को सस्पेंड कर दिया गया है। हादसा मंगलवार शाम को हुआ। हादसे में 30 के करीब लोग घायल हो गए हैं। वहीं, हादसे से पीड़ितों से मिलने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वाराणसी पहुंच गए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो बीम गिरने से नीचे दबी गाड़ियों में लोग घंटों कराहते रहे। मौके पर मौजूद लोग उनकी मदद करना चाह रहे थे, पानी पिला रहे थे लेकिन हजारों क्विंटल वजनी बीम पर किसी का वश नहीं चल रहा था। इस दौरान घायलों की जिंदगी से जद्दोजहद जारी रही और चिकित्सकीय मदद न मिलने के कारण तड़पते हुए सांस टूट गई।

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- फोटो : अमर उजाला
 मौजूद लोग घायलों का तड़प कर मरना देख चीख रहे थे और पुलिस-प्रशासन को कोस रहे थे लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे थे। चौतरफा मौजूद हजारों की भीड़ में मौजूद लोग बस यही पूछ रहे थे कि हादसा कैसे हुआ और दबे वाहनों के ऊपर से बीम को पुलिस और प्रशासन हटवा क्यों नहीं पा रहे हैं। इसे लेकर लोग पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से नोकझोंक पर उतारू हो रहे थे।
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पुलिस, पीएसी और एनडीआरएफ के साथ ही सेना के जवान गुस्साए लोगों को किसी तरह समझाबुझाकर शांत करा रहे थे। उधर, वसुंधरा और एईन कॉलोनी के सड़क किनारे बने मकानों की छतों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। छतों पर मौजूद लोग घटना की भयावहता के बारे में और राहत व बचाव कार्य में देरी पर पुलिस और प्रशासन को कोस रहे थे।
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देर से शुरू हुआ राहत कार्य, आधे घंटे बाद पहुंची पुलिस
बीम गिरने के बाद चंद कदम दूर तैनात पुलिस आधा घंटे बाद मौके पर पहुंची। इससे पहले स्थानीय लोगों ने ही फंसे लोगों को बाहर निकाला। यही वजह रही कि जब पुलिस ने बचाव कार्य शुरू किया तो स्थानीय लोगों का जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो लगभग साढ़े पांच बजे दो बीम गिरीं। एईएन कॉलोनी व आसपास के लोगों ने किनारे दबे लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
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इसके बाद अंदर फंसे लोगों को निकालने में जुट गए। लगभग छह बजे मौके पर फोर्स पहुंची। फिर भी स्थिति जस की तस रही। साढ़े छह बजे के लगभग क्रेन मौके पर पहुंचीं। जाम और फिर बीम गिरने के स्थान पर जगह न होने की वजह से रेलवे कॉलोनी की बाउंड्री तोड़ी गई और बचाव कार्य शुरू हो पाया।
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एनडीआरएफ के आने के बाद बचाव कार्य में तेजी आई। लगभग साढ़े सात बजे लोगों को निकाला जाना शुरू हुआ। यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम भी साढ़े सात बजे मौके पहुंची। इससे लोगों को समय से इलाज नहीं मिल पाया। रेलकर्मी घायलों को लेकर रेलवे के अस्पताल पहुंचे पर वहां भी प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाया। नतीजतन तमाम लोग खून बहने के  बाद भी इलाज के अभाव में तड़पते रहे।
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