विश्व हिंदू परिषद और श्रीराम जन्मभूमि न्यास तथा मंदिर निर्माण समिति 6 दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए दूसरी कारसेवा की घोषणा कर चुकी थी। इसमें शामिल होने के लिए विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी के साथ रथ पर सवार होकर 5 दिसंबर 1992 को अयोध्या जा रहे थे। रास्ते में उनका पड़ाव लखनऊ था और यहां से सांसद के नाते अटल बिहारी वाजेपयी स्वागत के लिए अमीनाबाद के झंडा वाले पार्क की सभा में मंच पर प्रमोद महाजन के साथ मौजूद थे।
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अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : social media
इस दौरान अमीनाबाद में जबरदस्त भीड़ थी। क्योंकि इस बार चर्चा थी कि आमतौर पर अयोध्या मामले पर दूरी बनाए रखने वाले भाजपा के उदारवादी चेहरा अटल भी इस बार कारसेवा में शामिल होने अयोध्या जा रहे हैं। एक बात और, कल्याण सिंह की सरकार ने चूंकि ढांचा की सुरक्षा करने और कोई नया निर्माण न करने का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दे रखा था इसलिए अटल के भाषण को लेकर लोगों में और भी अधिक उत्सकुता थी कि वह सरकार और साख के बीच किसे प्राथमकिता देंगे।
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अटल बिहारी वायपेयी
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इधर, आडवाणी और जोशी के रथ के पहुंचने में वक्त लग रहा था। शाम 7.30 बजे तो एक पर्ची अटल के पास आई। इसे देखने के बाद उनके चेहरे के भाव बदल गए। पर, आगे बोले तो उनके हर वाक्य से यह साफ होता गया कि क्या होने जा रहा है। हालांकि यह समझना मुश्किल था कि उन्होंने ऐसे शब्दों और वाक्यों का प्रयोग क्यों और कैसे किया, लेकिन उन्होंने संकेतों में कह बहुत कुछ दिया। अटल बोले, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप लोग वहां भजन-कीर्तन कर सकते हैं।
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अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : पीटीआई
अब भजन अकेले तो होता नहीं। सामूहिक होता है। कीर्तन के लिए और भी ज्यादा लोगों की जरूरत होती है। फिर भजन-कीर्तन खड़े होकर तो होगा नहीं। कब तक खड़े रहेंगे। जाहिर है कि बैठने की जगह बनानी होगी। भगवान की सेवा के लिए रामभक्त अयोध्या जा तो रहे हैं तो नुकीले पत्थरों व ईंटों और झाड़-झंखाड़ के बीच थोड़े न बैठेंगे। वहां के नुकीले पत्थरों को हटाना पड़ेगा। जमीन समतल करनी होगी। यज्ञ का आयोजन होगा तो कुछ निर्माण भी होगा। कम से कम वेदी तो बनानी ही पड़ेगी। मैं नहीं जानता कि कल वहां क्या होगा। अटल अपनी रौ में कह रहे थे, इस बार मैं भी अयोध्या जाकर कारसेवा में शामिल होना चाहता था, लेकिन नेतृत्व ने कहा, दिल्ली वापस जाओ। वहां तुम्हारी ज्यादा जरूरत है।
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अटल बिहारी वायपेयी
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मैं आदेश का पालन करूंगा। शरीर से मैं दिल्ली में रहूंगा, लेकिन आत्मा व मन अयोध्या में कारसेवकों के बीच। रामजी ने शायद मेरे लिए अन्य कुछ कार्य निर्धारित कर दिए हैं। कारसेवक कल शांतिपूर्वक कारसेवा करेंगे। वहां बैठकर राम नाम का कीर्तन करेंगे। न्यायालय के निर्देशों का पूरा सम्मान किया जाएगा।
सचमुच में सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा है, हम कारसेवा करें
अटल के भाषण ने मानों दिसंबर की ठंड का असर पूरी तरह खत्म कर दिया था। लोग हाथ उठाकर जय श्रीराम के नारे लगाते जा रहे थे। पर, जैसे उनके भाषण का क्लाइमेक्स अभी बाकी था। उन्होंने अपनी चिरपरिचित शैली में हाथ पर हाथ मारते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है वह कारसेवा रोकने के लिए नहीं है। सचमुच में तो सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा है, हम कारसेवा करें। रोकने का तो सवाल ही नहीं। कल कारसेवा करते हुए अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के किसी भी निर्णय की अवहेलना नहीं होगी बल्कि कारसेवा करके उनके निर्णय का सम्मान किया जाएगा। इधर, अटल के बदले अंदाज की चर्चा भीड़ में मौजूद हर जुबान पर थी। लोग कह रहे थे, ‘कल का दिन अयोध्या ही नहीं, इस देश के लिए भी खास होगा।’