यूपी में बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है। अनेक स्थानों पर शारदा, घाघरा और राप्ती खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। महराजगंज, गोरखपुर और गोंडा समेत कई जिलों में बंधे टूटने से भारी तबाही हुई है। अगले 24 घंटे में कई नदियों में पानी कम होने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन गंगा व घाघरा अभी और कहर ढा सकती हैं। (पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका दिखाती एक तस्वीर।)
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सिंचाई विभाग ने अपने सभी इंजीनियरों को चौबीसो घंटे मौके पर तैनात रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि दैवी आपदा से होने वाला नुकसान कम से कम हो सके। बंधों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि समय रहते उनकी मरम्मत की जा सके। अगर ऐसा करना संभव न हो तो स्थानीय प्रशासन को उसकी समय से सूचना देने के लिए कहा गया है। (बाराबंकी के टिकैतनगर क्षेत्र के बांसगांव में बाढ़ के पानी से बचने के लिए बांस-बल्ली के सहारे मचान बनाकर रहता वृद्घ ग्रामीण।)
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गुरुवार को लखीमपुर में शारदा, बाराबंकी, फैजाबाद और बलिया में घाघरा खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही थी। सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और गोंडा में राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कुन्हरा और कुआनो नदियां भी खतरे के निशान से करीब एक से डेढ़ मीटर तक ऊपर बह रही हैं। (बाराबंकी में घाघरा के पानी में डूबा एक गांव।)
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मौसम विज्ञानियों का कहना है कि शारदा, घाघरा और गंगा के अलावा शेष नदियों में 24 घंटे में पानी घटेगा। फतेहगढ़ में गंगा खतरे कानिशान छूने की ओर बढ़ रही है। अगले चौबीस घंटे में वहां जलस्तर में वृद्धि की आशंका जताई गई है।
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अगले 24 घंटों में प्रदेश के तराई और पश्चिमी हिस्सों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। हालांकि, यह बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद होगी, पर नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई स्थानों पर बाढ़ की समस्या भी पैदा होगी। (सीतापुर के रेउसा में नाव से मवेशी लेकर जाते ग्रामीण।)
प्रमुख सचिव, सिंचाई सुरेश चंद्रा ने बताया कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। राजस्व विभाग के जरिये लगातार राहत सामग्री भी बंटवाई जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई स्थानों पर बंधे टूटे हैं, जिससे लोगों का काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। (सीतापुर में बाढ़ का एक दृश्य।)