सरकारी दफ्तरों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले हफ्ते मंडी परिषद व कौशल विकास मिशन के कार्यालय में आग के बाद सोमवार को शक्ति भवन में आग लग गई।
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नौवें तल पर लगी आग से लेखाकार आरके सेठ का कमरा जल गया। इसमें दो कम्प्यूटर व कई महत्वपूर्ण फाइलें जलकर राख हो गईं।
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पहली नजर में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग सुबह करीब साढ़े सात बजे लगी। शक्ति भवन के ही फायर ब्रिगेड व सफाई कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस पर काबू पा लिया।
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मंडी परिषद और कौशल विकास मिशन निदेशालय, दोनों ही स्थानों में अकाउंट्स ऑफिस में आग लगी और महत्वपूर्ण दस्तावेज राख हो गए। शक्ति भवन में भी लेखाकार कार्यालय में आग लगी और महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए। (आग लगने के बाद साफ-सफाई करते कर्मचारी।)
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दो कम्प्यूटर, प्रिंटर, वर्क स्टेशन, कुर्सी-मेज व जरूरी फाइलें जल गईं। बताया जा रहा है कि जरूरी फाइलें सैनिक कल्याण निगम व डोयक के तैनात कर्मचारियों के वेतन आदि से संबंधित थीं। (शक्ति भवन के नीचे खड़े कर्मचारी आग शांत होने का इंतजार करते हुए।)
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इसके अलावा शक्ति भवन में सिविल वर्क के काफी काम हुए हैं। ऑडिट से इनकी फाइलें मांगी गई थीं। इन फाइलों के भी जलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
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आग से कौन-कौन सी फाइलें जली हैं, इसका पता जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही लगेगा। विभागीय अफसर रुटीन फाइलों के ही जलने की बात कह रहे हैं। कम्प्यूटर जलने से विभाग का महत्वपूर्ण डाटा भी नष्ट हो गया है। हालांकि अफसर कह रहे हैं कि आग पर जल्दी काबू पा लिया गया। इससे कैशबुक व आलमारी बच गई। यदि यह जल गए होते तो ज्यादा परेशानी होती।
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पावर कॉर्पोरेशन के एमडी एपी मिश्र ने इस मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच अधिशासी निदेशक आरके शर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति करेगी। इसमें संयुक्त सचिव अमरेन्द्र व उपसचिव संजीव कुमार सदस्य होंगे।
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यह समिति आग के कारणों का पता लगाएगी। साथ ही देखेगी कि आग में कौन-कौन सी महत्वपूर्ण फाइलें जली हैं। जांच समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।
एक्सपायरी डेट के थे फायर एक्सटिंग्विशर
शक्ति भवन के नौवें तल पर जहां आग लगी थी, वहां टंगे दो फायर एक्सटिंग्विशर भी एक्सपायर थे। इनमें लगी स्लिप के अनुसार एक फायर एक्सटिंग्विशर की रिफिल की तय तारीख आठ मई 2015 थी जबकि दूसरे की 17 मई 2015 थी, लेकिन इन्हें रिफिल नहीं कराया गया। अफसरों की लापरवाही का ही नतीजा है कि यहां एक्सपायरी डेट के फायर एक्सटिंग्विशर टंगे हुए हैं।