सरयू नदी के सफेद रेत से भरे कछार पर अपनी मेहनत व इच्छा शक्ति के दम पर रेत में भी फसलों को लहलहाने वाले किसान कोपेपुर, बरई, सराय नासिर, चक्का, उधरौरा, अब्बुपुर, सल्लाहपुर, नूरगंज, कैथी, मंहगूपुरवा, चिर्रा, खजुरी, कोटरा, खैरी व मुजैहना के मूल निवासी हैं।
इन किसानों की मेहनत और लगन से दूर-दूर फैले रेत के कभी चांदी की तरह चमकने वाले खेत अब हरे-भरे नजर आ रहे हैं। यहां की सब्जियों की आपूर्ति रुदौली, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, जगदीशपुर, गोंडा व बलरामपुर में की जाती है। थोक व्यापारी गांवों में भी आकर यहां से सस्ते दामों पर किसानों का उत्पाद खरीद कर मंडी तक ले जाते हैं। जहां ऊंचे भाव में बेचते हैं।