दरअसल पूर्वी यूपी का किसान पश्चिमी यूपी के किसानों की तरह आर्थिक रूप से समृद्ध और खेती-किसानी को लेकर बहुत जागरूक नहीं हैं। इसके बावजूद इस इलाके के किसानों में राजनीतिक चेतना, जागरूकता व मुखर संघर्ष की क्षमता कम नहीं है। अतीत के कई आंदोलन इसके उदाहरण हैं।
हालांकि यह भी सही है कि दिल्ली की सीमा पर चल रहा आंदोलन अब पहले जितना न धारदार और असरदार नहीं रही। पर, पिछले दिनों किसान नेता नरेश टिकैत ने पूर्वी यूपी के कुछ जिलों के दौरे में जिस तरह से किसानों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की अपील की थी, उससे भाजपा सतर्क हो गई है।