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14 वर्ष की उम्र में सुविधाओं के अभाव में सुधा ने जीता था पहला पदक, मां-बाप बोले-बेटी पर गर्व

Tue, 28 Aug 2018 01:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सुधा सिंह - फोटो : amar ujala
रायबरेली जिले की उड़नपरी के नाम से मशहूर एथलेटिक्स खिलाड़ी सुधा सिंह ने एशियन गेम्स में भारत के लिए एक बार फिर पदक झटका। यह उनका 39वां पदक है। महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज मुकाबले में  सिल्वर मेडल हासिल करके उन्होंने अपनी श्रेष्ठता साबित की है। उनकी इस कामयाबी पर रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी और सुधा के परिजनों ने क्या कहा- ये पढ़िए आगे की स्लाइड्स में।
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सुधा सिंह - फोटो : amar ujala
सुधा सिंह के मेडल पाने की खबर मिलते ही परिवार वालों के साथ ही प्रशंसकों और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। बचपन से ही खेल की शौकीन रही सुधा सिंह ने अपनी शिक्षा रायबरेली जिले से ही पूरी की। एथलेटिक्स के क्षेत्र में सुधा की शुरुआत वर्ष 2003 में लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज से हुई। 
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सुधा सिंह - फोटो : amar ujala
स्टीपलचेज की खिलाड़ी सुधा सिंह ने अपनी कामयाबी के बीच किसी को भी आने नहीं दिया। यही वजह है कि 14 वर्ष में ही उन्होंने पहला पदक जीता। वर्ष 2012 की अर्जुन अवार्ड विजेता एवं देश की जानी-मानी एथलीट सुधा सिंह ने एशियन गेम्स में अपने देश को मेडल दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की थी।

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सुधा सिंह - फोटो : amar ujala
एशियन गेम्स में रजत पदक हासिल करने के बाद सुधा सिंह ने सबसे पहले अपने घर पर फोन लगाया। उन्होंने अपने पिता हरिनारायण सिंह, मां शिव कुमारी सिंह, भाई प्रवेश सिंह से बातचीत करते हुए इस उपलब्धि पर खुशी जताई। परिवारीजनों ने भी सुधा को मिली उपलब्धि पर खुशी जताते हुए बधाई दी। 
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सुधा सिंह के परिजन - फोटो : amar ujala
इस दौरान बेटी की उपलिब्ध पर मां-पिता की आंखें भर आईं। कहा कि बेटी ने हमेशा हमारा मान बढ़ाया है। भाई प्रवेश ने कहा कि सुधा भले ही स्वर्ण पदक पाने से चूक गईं, फिर भी वह रजत पदक से वह काफी खुश हैं। ये हमारे लिए गौरव की बात है। भाई का कहना है कि जिस तरह यहां सुविधाओं का अभाव है, उसमें सुधा की अपनी मेहनत ही है कि वह निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। एशियन गेम्स में भी पदक हासिल करने के लिए सुधा ने दिन-रात कड़ी मेहनत की थी। (फोटो में सुधा के परिवारीजन)
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